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विंध्याचल: वन विभाग की जमीन पर दुकानों-वाहन स्टैंडो का कब्जा, आखिर अभी तक इन स्थानों पर क्यों नहीं किया गया सीमांकन

विंध्याचल: वन विभाग की जमीन पर दुकानों-वाहन स्टैंडो का कब्जा, आखिर अभी तक इन स्थानों पर क्यों नहीं किया गया सीमांकन


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

*कालीखोह-अष्टभुजा में अवैध वसूली का खेल, लाखों की बंदरबांट का आरोप*

 

*विंध्याचल।* मां विंध्यवासिनी धाम के दो प्रमुख शक्ति पीठ कालीखोह और अष्टभुजा मंदिर की पहाड़ियों पर वन विभाग की जमीन अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई है। यहां दर्जनों दुकानदारों और अवैध वाहन स्टैंडों ने कब्जा जमा रखा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वन विभाग आखिर अपनी जमीनों का सीमांकन क्यों नहीं करा रहा है?

 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कालीखोह मंदिर परिसर में दो दर्जन से अधिक दुकानें वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। वहीं अष्टभुजा मंदिर क्षेत्र में भी इन दिनों दर्जनों नए दुकानदारों ने कब्जा कर लिया है। आरोप है कि यह सब वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है। हर महीने लाखों रुपये की वसूली कर बंदरबांट की जा रही है।

 

*विवाद पर दुकानें बंद, फिर शुरू होती वसूली*

 

दुकानदारों का खेल भी अनोखा है। जब किसी यात्री अथवा स्थानीय लोगों से विवाद या मारपीट हो जाती है तो कार्रवाई के डर से सभी दुकानें महीनों तक बंद कर दी जाती हैं। जैसे ही मामला शांत होता है, ‘वसूली गैंग’ फिर सक्रिय हो जाता है और दुकानें धड़ल्ले से खुल जाती हैं। श्रद्धालुओं से मनमाने दाम वसूले जाते हैं। शिकायत करने पर धमकाया भी जाता है।

 

*जिला पंचायत ने भी दे दी वन भूमि पर स्टैंड की अनुमति*

 

हैरानी की बात यह है कि वन विभाग की जमीन पर ही जिला पंचायत द्वारा कई वाहन स्टैंड भी आवंटित कर दिए गए हैं। इन स्टैंडों पर न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी का कोई ढंग का इंतजाम। बावजूद इसके, वाहनों से जबरन वसूली की जा रही है। रसीद पर मनमाना शुल्क लिखा जाता है। विरोध करने पर यात्रियों से बदसलूकी आम बात है।

दुकान में ही चल रहे वाहन स्टैंड

दोनों मंदिरों के आसपास हालात यह हैं कि जिन जगहों पर दुकानों को कब्जा दिलाया गया है, उसी परिसर में वाहन स्टैंड भी खोल दिए गए हैं। यानी एक ही जगह से दोहरी वसूली का खेल चल रहा है। श्रद्धालुओं को मजबूरन ऊंचे दाम पर पार्किंग और प्रसाद-पूजन सामग्री खरीदनी पड़ती है।

विभाग मौन, श्रद्धालु परेशान

सबसे अहम सवाल वन विभाग की चुप्पी पर है। अगर यह भूमि वन विभाग की है तो अब तक सीमांकन कर अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया? सीमांकन न होने से ही अवैध कब्जेदारों के हौसले बुलंद हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां के दरबार में आकर भी उन्हें लूट और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि तत्काल जमीन का सीमांकन कराकर अवैध कब्जे हटाए जाएं और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो। साथ ही वाहन स्टैंड के नाम पर हो रही अवैध वसूली पर रोक लगाई जाए, ताकि मां विंध्यवासिनी धाम की गरिमा बनी रहे।


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