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सोनभद्र: म्योरपुर में मिलेट्स पुनरुत्थान प्रशिक्षण, किसानों को जैविक खेती और मोटे अनाज के उत्पादन के लिए किया गया प्रेरित

सोनभद्र: म्योरपुर में मिलेट्स पुनरुत्थान प्रशिक्षण, किसानों को जैविक खेती और मोटे अनाज के उत्पादन के लिए किया गया प्रेरित


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

 

सोनभद्र। म्योरपुर विकासखंड परिसर में सोमवार को किसानों एवं अध्यापकों के लिए मिलेट्स पुनरुत्थान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्लॉक प्रमुख मान सिंह गोंड ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने का माध्यम ही नहीं हैं, बल्कि यह लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा की भी मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक खेती की समृद्ध विरासत को अपनाते हुए मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण सत्र में जैविक खेती विशेषज्ञ शिव शरण सिंह ने किसानों और शिक्षकों को मिलेट्स की खेती की वैज्ञानिक एवं जैविक विधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाजरा, ज्वार, कोदो, कुटकी, रागी सहित अन्य मोटे अनाज कम लागत, कम पानी और विपरीत मौसम में भी बेहतर उत्पादन देने वाली फसलें हैं। उन्होंने कहा कि मिलेट्स पोषण से भरपूर होते हैं तथा इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम, आयरन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो कुपोषण एवं विभिन्न जीवनशैली संबंधी बीमारियों की रोकथाम में भी सहायक हैं।

कार्यक्रम में उप निदेशक कृषि राजकुमार ने किसानों को मिलेट्स आधारित खेती को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में मोटे अनाज भविष्य की खेती का मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कम सिंचाई, कम लागत और बेहतर बाजार संभावनाओं के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं और मिलेट्स प्रोत्साहन कार्यक्रमों की भी जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों एवं अध्यापकों को मोटे अनाजों की उन्नत किस्मों, जैविक उत्पादन तकनीक, फसल प्रबंधन, भंडारण, प्रसंस्करण तथा विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान की गईं। विशेषज्ञों ने किसानों से पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मिलेट्स को भी अपनी खेती का हिस्सा बनाने की अपील की, ताकि खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बन सके।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, अध्यापक, कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त जानकारी को व्यवहारिक रूप से अपनाने और अपने क्षेत्र में मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।


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