
_रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था’: मिर्ज़ापुर और विंध्याचल में विकास के दावों की खुली पोल, जनता बेहाल_
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
जनपद के विंध्याचल और मुख्य नगर क्षेत्र में विकास के नाम पर ‘चादर ओढ़ कर घी पीने’ का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। विंध्याचल कॉरिडोर से लेकर गंगा घाटों पर हो रहे निर्माण कार्यों की जमीनी हकीकत अत्यंत चिंताजनक है। निर्माण की गुणवत्ता को देखने-परखने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी धरातल पर नजर नहीं आ रहा है, जिससे डबल इंजन सरकार के विकास के दावों की सरेआम पोल खुल रही है।
बरसात सिर पर, कीचड़ और जलजमाव की जद में शहर
आगामी बरसात का मौसम सामने है और पूरा शहर अभी से जर्जर सड़कों के कारण खौफ में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण के तमाम बड़े दावों को भ्रष्टाचार के एक झटके ने हवा में उड़ा दिया। बारिश होते ही पूरी सड़क कीचड़ के समंदर में तब्दील हो जाएगी। जलजमाव की इस विभीषिका के बीच सबसे ज्यादा मुसीबत स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों, वृद्धों और आम राहगीरों को उठानी पड़ेगी, जो इस बदहाली के कारण हादसों का शिकार होने को मजबूर होंगे।
तीर्थयात्री परेशान, सोशल मीडिया पर चमक रहे नेता
विंध्याचल धाम में प्रतिदिन हजारों-हजार की संख्या में दूर-दराज से श्रद्धालु आ रहे हैं, लेकिन यहां की बदहाल और गड्ढायुक्त सड़कें उनका स्वागत कर रही हैं। जनता का कहना है कि सत्ता और सियासत के सारथी इस बदहाली से पूरी तरह बेफिक्र हैं। वे विकास की इस ‘मैली गंगा’ में अपने पांव धोकर लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं और सोशल मीडिया पर चमकते वीडियो वायरल करने में व्यस्त हैं।
जनता का आक्रोश: “नारा तो ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ का दिया गया था, लेकिन जमीन पर सिर्फ फरेब दिख रहा है। मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुसलमान के नाम पर जनता को बरगलाया जा रहा है ताकि मूल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।”
आज मिर्ज़ापुर नगर की स्थिति हुबहू वैसी ही हो चुकी है जैसी उस ऐतिहासिक कहावत में कही गई है कि— “जब रोम जल रहा था, तो नीरो बांसुरी बजा रहा था।” अब देखना यह है कि इस प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक तमाशे के बीच मिर्ज़ापुर की जनता को नारकीय जीवन से कब मुक्ति मिलती हैं