
लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीज की मौत के बाद हंगामा, परिजनों ने लगाया इलाज में देरी का आरोप
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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गंभीर हालत में करीब चार घंटे इंतजार कराने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के बढ़ौली चौक स्थित लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर में शनिवार को एक मरीज की मौत के बाद हंगामा खड़ा हो गया। मृतक के परिजनों ने सेंटर के चिकित्सक पर गंभीर हालत में भी समय पर इलाज न करने और मरीज को लंबे समय तक इंतजार कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
मृतक की पत्नी के अनुसार उनके पति पेट में तेज दर्द से परेशान थे और लगातार कराह रहे थे। आरोप है कि गंभीर हालत को देखते हुए परिजनों ने कई बार चिकित्सक से तत्काल इलाज शुरू करने की गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद मरीज को करीब चार घंटे तक इंतजार कराया गया। परिजनों का कहना है कि जब मरीज की हालत अधिक बिगड़ने लगी और उन्हें अंदर ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया। आरोप है कि मरीज की मौत के बाद सेंटर के चिकित्सक ने शव को सेंटर के गेट के बाहर रखने के लिए कहा, जिसके बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई और हंगामे की स्थिति बन गई।
सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया और स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, इस घटना ने लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सेंटर को लेकर पूर्व में भी इस प्रकार की घटनाएं और शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद यदि स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की गंभीरता से जांच नहीं की गई, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जिम्मेदार विभाग संबंधित सेंटर पर कार्रवाई करने के बजाय किस आधार पर मेहरबान बना हुआ है।
अब मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। घटना के दिन सेंटर में मौजूद चिकित्सक एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच के साथ ही मरीज के उपचार में हुई कथित देरी, सेंटर की वैधता, उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं और पूर्व में मिली शिकायतों की भी जांच की जाए।
लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सकेगा तथा यह स्पष्ट होगा कि मरीज की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई।
फिलहाल परिजनों के आरोपों की जांच और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।