
कसूरवार कौन, बारिश या बदहाल व्यवस्था?: दो दिन में 14 मौतों की पूरी कहानी
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
उत्तर प्रदेश
सिर्फ दो दिन की बारिश में उत्तर प्रदेश में 14 लोगों की मौत हो गई। मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा में जलभराव, खुले नाले, करंट और दीवार गिरने जैसे हादसों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ये सिर्फ प्राकृतिक आपदा थी या बदहाल व्यवस्था की बड़ी नाकामी?
उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो दिन की बारिश ने 14 लोगों की जान ले ली। कहीं सड़क पर करंट दौड़ गया, कहीं दीवार गिर गई, तो कहीं लोग जलभराव में डूब गए। वजह चाहे जो भी हो, सवाल है कि क्या इन मौतों को रोका जा सकता था? मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा से सामने आई घटनाएं बता रही हैं कि लोगों की जान सिर्फ बारिश से नहीं, बल्कि बदहाल व्यवस्था के कारण गई।
*मेरठ में अंडरपास में समा गई घोड़ा-बग्गी*
सबसे पहले बात मेरठ की। यहां लोहिया नगर के बजौट रेलवे अंडरपास में करीब 10 फीट तक पानी भर गया और एक घोड़ा-बग्गी उसमें समा गई। बग्गी चालक राकेश और उनके बेजुबान घोड़े की मौत हो गई। एक दिन पहले ही लोहिया नगर के इसी अंडरपास में दो युवकों की कार पानी में फंस गई थी। स्थानीय लोगों ने रस्सी की मदद से उन्हें बचाया। वहीं, कंकरखेड़ा रेलवे अंडरब्रिज में एक बैंक शाखा प्रबंधक की कार भी पानी में फंस गई थी। वह किसी तरह कार से बाहर निकलने में सफल रहीं। अब बात मेरठ के इंचौली क्षेत्र की। यहां जलभराव इतना ज्यादा हो गया कि सड़क और तालाब का फर्क खत्म हो गया। एक कार सीधे तालाब में जा गिरी और चालक की डूबने से मौत हो गई।
*गाजिबाद में हादसों का जिम्मेदार कौन?*
अब चलते हैं गाजियाबाद। इंदिरापुरम में जलभराव के बीच एक 24 वर्षीय सुरक्षा गार्ड सड़क पार कर रहा था। तभी पानी में करंट उतर आया और उसकी मौत हो गई गाजियाबाद की ही सर्वोदय कॉलोनी में सिर्फ तीन साल की एक मासूम बच्ची घर के बाहर भरे बारिश के पानी में फिसल गई और डूबने से उसकी मौत हो गई। लोनी के अंकुर विहार स्थित मिलक गांव के पास पानी से भरे गड्ढे में डूबने से सात वर्षीय पोलू की भी मौत हो गई। दरअसल, बारिश के चलते क्षेत्र की अधिकांश गलियां जलमग्न थीं। पोलू खेलते-खेलते गड्ढे में गिर गया। मोदीनगर में कन्नन ग्रीन सोसाइटी के पास लगातार बारिश के कारण सोसाइटी की चारदीवारी झुग्गी-झोपड़ियों पर गिर गई। मलबे में दबकर एक मजदूर की मौत हो गई।
*नोएडा में खुले नाले में गिरने से इंजीनियर की मौत*
अब बात नोएडा की। यहां एक युवा इंजीनियर जलभराव के बीच खुले नाले में गिर गया। लोगों ने उसे बाहर निकालकर सीपीआर भी दी, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। कहीं अंडरपास डूब गया, कहीं सड़क और तालाब का फर्क खत्म हो गया, कहीं खुले नाले जानलेवा साबित हुए, तो कहीं करंट दौड़ गया या दीवारें गिर गईं। बारिश प्राकृतिक है, लेकिन हर साल ऐसे हादसों का दोहराया जाना कई सवाल खड़े करता है। क्या शहरों के ड्रेनेज सिस्टम की समय पर सफाई हुई थी? क्या जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी? और क्या समय रहते बेहतर तैयारी होती, तो इनमें से कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी?