
चिकित्सक विहीन पीएचसी कचनारवा पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, प्रदर्शन कर लापरवाह डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
कोन/सोनभद्र। नवसृजित विकास खंड कोन एवं सीएचसी चोपन अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कचनारवा की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। वर्षों से चिकित्सक की नियमित अनुपस्थिति से नाराज स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और लापरवाह चिकित्साधिकारी पर कार्रवाई की मांग उठाई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचसी कचनारवा में एक चिकित्सक की नियुक्ति होने के बावजूद डॉक्टर अस्पताल में शायद ही कभी दिखाई देते हैं। बताया गया कि चिकित्साधिकारी महीने में केवल एक दिन आकर कागजी औपचारिकताएं पूरी कर लेते हैं, जबकि बाकी दिनों में अस्पताल भगवान भरोसे संचालित होता है। ऐसे में क्षेत्र की भोली-भाली जनता इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
प्रदर्शन कर रहे वरिष्ठ समाजसेवी जोखन प्रसाद, गंगा प्रसाद और कैलास राम ने आरोप लगाया कि जब अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती है तो आखिर मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं क्यों नहीं मिल रही हैं। उनका कहना था कि मजबूरी में लोग झोला छाप डॉक्टरों के पास जाने को विवश हैं, जिससे कई बार लोगों की जान तक खतरे में पड़ रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 12 किलोमीटर के दायरे में बसे लोगों के लिए यही एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। अस्पताल परिसर में गंदगी और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। शौचालय व्यवस्था बदहाल है तथा बिजली की समुचित व्यवस्था न होने से रात में आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ प्रदेश सरकार गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही हैं।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से जोखन प्रसाद, बिहारी प्रसाद यादव, गंगा प्रसाद, अमरकेश, कैलास राम, रघुवर प्रसाद समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
वहीं पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी कचनारवा से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। हालांकि उन्होंने अपने फर्मासिस्ट से मामले की जानकारी जरूर ली, पर पत्रकारों से बात करना उचित नहीं समझा।
इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक चोपन ने कहा कि मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जाएगी। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पी.के. राय ने भी कहा कि मामले को दिखवाया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति की जानकारी आखिर विभागीय अधिकारियों को क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्साधिकारी से मांग की है कि लापरवाह चिकित्सक को तत्काल हटाकर नियमित डॉक्टर की नियुक्ति की जाए, ताकि क्षेत्रीय जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।