
सोनभद्र में बिजली विभाग पर भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप, ₹3108 का बिल बना ₹56 हजार, उपभोक्ता की आंखों से छलके आंसू
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
सोनभद्र। जनपद में बिजली विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विभागीय लापरवाही, कथित भ्रष्टाचार और स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ताजा मामलों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां मामूली बकाया राशि को कुछ ही मिनटों में कई गुना बढ़ाने का आरोप लगा है, वहीं दूसरी ओर एक घरेलू उपभोक्ता के यहां मात्र तीन माह में एक लाख से अधिक का बिजली बिल पहुंचने से हड़कंप मच गया है।
डाला निवासी पीड़ित सुरेश कुमार उपाध्याय ने बिजली विभाग में तैनात एक बाबू पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। पीड़ित के अनुसार उनके ऊपर केवल 3108 रुपए बिजली बिल बकाया था। एसडीओ के निर्देश पर वह पिपरी उपखंड कार्यालय पहुंचे, जहां तैनात बाबू चंद्रकांत ने उनका बिल अपने पास रख लिया और कथित रूप से 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग करने लगे।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने पैसे देने में असमर्थता जताई तो उन्हें धमकी दी गई कि “पैसा नहीं दोगे तो बिल और बढ़ जाएगा।” सुरेश उपाध्याय ने बताया कि काफी विनती के बावजूद जब उन्होंने रिश्वत नहीं दी तो महज कुछ ही मिनटों में उनका बिजली बिल पहले 38 हजार रुपए और फिर बढ़ाकर 56 हजार 950 रुपए कर दिया गया।
अपनी पीड़ा बताते समय सुरेश उपाध्याय भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित बाबू पिछले करीब 20 वर्षों से एक ही कार्यालय में तैनात हैं और उपभोक्ताओं से अवैध वसूली करते हैं। पीड़ित ने पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
वहीं रॉबर्ट्सगंज उपखंड क्षेत्र से भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत बारी महेवा निवासी सुनीता देवी पत्नी रामजीवान भारती के घरेलू बिजली कनेक्शन पर महज तीन माह में 1 लाख 6 हजार रुपए का बिजली बिल पहुंच गया। परिजनों का कहना है कि घर में सामान्य घरेलू उपयोग होने के बावजूद इतना भारी-भरकम बिल आना समझ से परे है। बताया जा रहा है कि उपभोक्ता के यहां स्मार्ट मीटर लगा हुआ है।
दोनों मामलों के सामने आने के बाद अब बिजली विभाग की बिलिंग प्रणाली, स्मार्ट मीटर की विश्वसनीयता और विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यदि उपभोक्ताओं के आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल होगा, बल्कि स्मार्ट मीटर और सटीक बिलिंग के सरकारी दावों की भी पोल खोल देगा।
फिलहाल जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिशासी अभियंता को जांच कर आवश्यक कार्रवाई एवं शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पीड़ित उपभोक्ताओं को न्याय मिल पाता है या नहीं।