
अंधविश्वास ने ली सात वर्षीय मासूम की जान, पांच दिन तक नहीं कराया इलाज
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
म्योरपुर। सोनभद्र के म्योरपुर कस्बे में अंधविश्वास के चलते सात वर्षीय मासूम की जान चली गई। परिजनों ने बच्चे की बीमारी को ग्रामीण मान्यता के अनुसार ‘गालो माई’ समझ लिया और गंभीर हालत के बावजूद समय पर उसका समुचित इलाज नहीं कराया। करीब पांच दिन तक तेज बुखार और चेहरे पर सूजन से जूझने के बाद शुक्रवार को बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) म्योरपुर लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान म्योरपुर निवासी गोपाल रवानी के सात वर्षीय पुत्र कृष्णा के रूप में हुई है। पिता गोपाल ने बताया कि कृष्णा को पिछले पांच दिनों से तेज बुखार था। इसके साथ ही उसके दोनों गालों के नीचे सूजन भी हो गई थी। शुरुआत में परिजनों ने दो दिनों तक एक निजी अस्पताल में उसका इलाज कराया, लेकिन बाद में परिचितों और ग्रामीणों ने इसे ‘गालो माई’ की बीमारी बताते हुए आगे इलाज न कराने की सलाह दी।
परिजनों ने उनकी बात पर भरोसा कर बच्चे का उपचार बंद कर दिया। इस दौरान कृष्णा की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। शुक्रवार दोपहर उसकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई। आनन-फानन में परिजन उसे सीएचसी म्योरपुर लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
सीएचसी में तैनात डॉ. संजीव बिंद ने बच्चे की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास के कारण समय पर इलाज न मिलने की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है।
चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों में तेज बुखार, शरीर या चेहरे पर सूजन अथवा अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर झाड़-फूंक या किसी मान्यता के भरोसे रहने के बजाय तत्काल योग्य चिकित्सक से जांच और उपचार कराना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सहायता मिलने से कई गंभीर स्थितियों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।