
सोनभद्र: डेढ़ साल बाद भी अधूरी पड़ी 13 करोड़ की सड़क, ठेकेदार लापता, हजारों छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
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सोनभद्र जनपद के रॉबर्ट्सगंज विकासखंड अंतर्गत ऊँचडीह-करकी माइनर संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य शुरू होने के लगभग डेढ़ वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित की जा रही लगभग 10 किलोमीटर लंबी सड़क आज भी अधूरी पड़ी है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य बीच में छोड़कर ठेकेदार गायब हो गया है, जबकि संबंधित विभाग भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करता दिखाई नहीं दे रहा।
ग्रामीणों के अनुसार पीडब्ल्यूडी द्वारा डेढ़ वर्ष पूर्व सड़क निर्माण का कार्य शुरू कराया गया था, लेकिन शुरुआत से ही कार्य की गति बेहद धीमी रही। इतने लंबे समय के बाद भी केवल लगभग 4 किलोमीटर सड़क का ही निर्माण हो पाया है, जबकि शेष मार्ग आज भी बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है।
सबसे अधिक परेशानी जीवार से ऊँचडीह तक लगभग 4 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हो रही है, जो पूरी तरह जर्जर और गड्ढों में तब्दील हो चुका है। बरसात के मौसम में सड़क पर जलभराव और कीचड़ के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
यह सड़क क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी मार्ग पर दो इंटर कॉलेज, एक डिग्री कॉलेज, एक आईटीआई कॉलेज तथा एक डी-फार्मेसी कॉलेज स्थित हैं, जहां प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी आवागमन करते हैं। खराब सड़क के कारण विद्यार्थियों को समय पर विद्यालय और कॉलेज पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार छात्र-छात्राएं फिसलकर घायल भी हो चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार जानबूझकर निर्माण कार्य में लापरवाही और ढिलाई बरत रहा है। कई महीनों से निर्माण स्थल पर न तो मजदूर दिखाई दे रहे हैं और न ही कोई मशीनरी कार्यरत है। इससे लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराकर लापरवाह ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा अधूरी सड़क का निर्माण शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों, विद्यार्थियों और राहगीरों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।