
सोनभद्र: 10 वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहा भगाही प्राथमिक विद्यालय, छात्र-छात्राओं को हो रही भारी परेशानी
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
सोनभद्र जनपद के घोरावल विकासखंड अंतर्गत भरकना ग्राम पंचायत स्थित भगाही प्राथमिक विद्यालय पिछले लगभग एक दशक से पेयजल संकट की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को प्रतिदिन स्वच्छ पेयजल के अभाव में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय परिसर में पेयजल की कोई नियमित और स्थायी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। नल-जल योजना के अंतर्गत विद्यालय में एक टोटी तो लगाई गई है, लेकिन उसमें सुबह लगभग 7 बजे केवल एक घंटे तक ही पानी की आपूर्ति होती है। इसके बाद पूरे दिन पानी उपलब्ध नहीं रहता और पुनः शाम लगभग 5 बजे के बाद ही पानी आता है। ऐसे में विद्यालय के संचालन के दौरान बच्चों और शिक्षकों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि अधिकांश छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन अपने घरों से पानी की बोतलें लेकर विद्यालय आना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। कई बार पानी समाप्त हो जाने पर उन्हें प्यासे ही समय बिताना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
विद्यालय परिसर में पूर्व में लगाया गया समरसेबल पंप भी कथित रूप से चोरी हो चुका है, जिसके कारण वैकल्पिक जल स्रोत पूरी तरह बंद हो गया है। वहीं विद्यालय की छत पर स्थापित पानी की टंकी भी जर्जर एवं क्षतिग्रस्त अवस्था में है, जिससे पानी का सुरक्षित भंडारण संभव नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) तैयार करने के लिए भी पहले से अलग व्यवस्था कर पानी का संग्रह करना पड़ता है, जिससे रसोइयों और विद्यालय स्टाफ को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों, अभिभावकों और विद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि शिक्षा के मंदिर में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का वर्षों तक अभाव रहना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने जिला प्रशासन, बेसिक शिक्षा विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि विद्यालय में नए समरसेबल पंप की स्थापना, क्षतिग्रस्त पानी की टंकी का तत्काल प्रतिस्थापन तथा पूरे समय नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की स्थायी व्यवस्था शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके और उनका शैक्षणिक वातावरण बेहतर बन सके।