
जिगना के 132 केवी सब स्टेशन में करंट से राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत, तिरंगे में लपेटकर पूरे सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
मिर्जापुर के जिगना क्षेत्र स्थित 132 केवी विद्युत उपकेंद्र परिसर में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां हाई टेंशन विद्युत तार की चपेट में आने से देश के राष्ट्रीय पक्षी मोर की करंट लगने से मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद विभागीय टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
उप वन क्षेत्राधिकारी विनयेन्द्र यादव ने बताया कि सूचना प्राप्त होते ही वन दरोगा अवधेश कुमार सहित वन विभाग के कर्मचारियों को घटनास्थल पर भेजा गया। टीम ने मृत मोर के शव को अपने कब्जे में लेकर नियमानुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई। राजकीय पशु चिकित्सालय विजयपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रत्नेश की देखरेख में पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें प्रथम दृष्टया मृत्यु का कारण विद्युत करंट बताया गया।
पोस्टमार्टम के उपरांत वन विभाग ने राष्ट्रीय पक्षी के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए मोर के शव को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में लपेटकर पूरे राजकीय सम्मान के साथ वन क्षेत्राधिकारी लालगंज कार्यालय परिसर के समीप गहरे गड्ढे में दफनाया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मोर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय पक्षी मोर भारतीय जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे पक्षियों की असामयिक मृत्यु पर्यावरण संरक्षण के लिए चिंता का विषय है।
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। जिगना सहित आसपास के क्षेत्रों में पहले भी कई बार हाई टेंशन बिजली लाइनों की चपेट में आने से मोरों की मौत हो चुकी है। खुले विद्युत तार और उपकेंद्रों के आसपास पर्याप्त सुरक्षा उपाय न होने के कारण वन्यजीव अक्सर हादसों का शिकार बन जाते हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद प्रभावी और स्थायी समाधान नहीं निकल पाने से वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है।
स्थानीय नागरिकों ने विद्युत विभाग और वन विभाग से मांग की है कि उपकेंद्रों तथा हाई टेंशन लाइनों के आसपास ऐसे सुरक्षा उपाय किए जाएं, जिससे राष्ट्रीय पक्षी सहित अन्य वन्यजीवों को करंट लगने की घटनाओं पर रोक लग सके। विशेषज्ञों का भी मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में इंसुलेटेड उपकरण, बर्ड गार्ड और अन्य सुरक्षा तकनीकों का उपयोग कर ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।