
लघु डाल नहर खंड की लापरवाही से सूखे तालाब, सिंचाई व्यवस्था चरमराई; पशु-पक्षियों पर जल संकट गहराया
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
जिगना क्षेत्र में कार्यदाई संस्था लघु डाल नहर खंड की लचर कार्यप्रणाली के कारण नहरों से सिंचित क्षेत्रों के पोखरों और तालाबों की स्थिति दयनीय हो गई है। जलभराव के अभाव में अधिकांश तालाबों और पोखरों की तलहटी सूख चुकी है तथा उनमें गहरी दरारें पड़ गई हैं। इससे क्षेत्र में मवेशियों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों के सामने पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
यह स्थिति तब देखने को मिल रही है, जब जनपद के जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार द्वारा जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए सभी जलाशयों, अमृत सरोवरों और तालाबों में पर्याप्त जलभराव सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। बावजूद इसके संबंधित विभाग की उदासीनता के चलते जमीनी स्तर पर हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं।
क्षेत्र की महत्वपूर्ण 30 क्यूसेक क्षमता वाली नारायण घाट लिफ्ट पंप कैनाल भी बदहाली का शिकार है। गंगा नदी से बार्ज के माध्यम से हौज तक पाइपलाइन जोड़कर जलापूर्ति किए जाने की योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। परिणामस्वरूप नहरों और तालाबों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
सींचपाल शिवकांत पांडेय के अनुसार हाल ही में आए आंधी-तूफान के कारण कई स्थानों पर विद्युत तारों और खंभों पर पेड़ गिर गए, जिससे विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके चलते पंप कैनालों का संचालन भी बाधित हो गया है।
वहीं हरगढ़ प्रथम, हरगढ़ द्वितीय, अर्जुनपुर तथा नारायण घाट पंप कैनाल क्षेत्रों में पाइपलाइनें अव्यवस्थित ढंग से इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं, जो विभागीय लापरवाही की कहानी बयां कर रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही जलापूर्ति व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल संकट भी और गहरा सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर तालाबों में जलभराव सुनिश्चित कराने तथा नहर एवं पंप कैनाल व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि किसानों और पशुपालकों को राहत मिल सके।