
बिना बिजली के कनेक्शन के थमा दिए हजारों के बिल, म्योरपुर के मधुबन गांव में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
सोनभद्र। जनपद के म्योरपुर विकासखंड अंतर्गत मधुबन गांव में बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। कुंडाडीह विद्युत उपकेंद्र से जुड़े आधा दर्जन आदिवासी परिवारों को बिना बिजली आपूर्ति और बिना वास्तविक कनेक्शन के ही हजारों रुपये के बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन घरों के नाम पर बिल जारी किए गए हैं, वहां आज तक न तो बिजली के पोल लगाए गए हैं, न ही विद्युत लाइन बिछाई गई है और न ही एक दिन के लिए बिजली आपूर्ति हुई है।
पीड़ित ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी सोनभद्र तथा विद्युत वितरण खंड म्योरपुर के सहायक अभियंता को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, फर्जी तरीके से जारी किए गए बिजली बिलों को तत्काल निरस्त करने तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीण राय सिंह, राज नारायण, राम दुलारे, भागीरथी सहित अन्य आदिवासी परिवारों ने बताया कि लगभग सात वर्ष पूर्व बिजली विभाग के कर्मचारी गांव पहुंचे थे। उन्होंने ग्रामीणों से आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर घरों में बिजली मीटर लगा दिए थे। उस समय अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि शीघ्र ही पूरे टोले में बिजली के पोल लगाए जाएंगे, तार खींचे जाएंगे और नियमित विद्युत आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। इस आश्वासन पर ग्रामीणों ने सहयोग भी किया, लेकिन सात वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव में विद्युतीकरण का कार्य अधूरा ही पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि आज तक उनके घरों तक बिजली नहीं पहुंची, लेकिन विभाग लगातार बिजली बिल भेज रहा है। किसी उपभोक्ता के नाम लगभग 54 हजार रुपये, तो किसी के नाम 40 से 50 हजार रुपये तक के बकाया बिल दर्ज कर दिए गए हैं। इन बिलों को देखकर गरीब आदिवासी परिवारों में भय और चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि जब उन्होंने कभी बिजली का उपयोग ही नहीं किया, तो आखिर इतना भारी-भरकम बिल किस आधार पर बनाया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही और रिकॉर्ड में की गई गड़बड़ी का खामियाजा गरीब आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे इतने बड़े बिलों का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्हें आशंका है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में उनके खिलाफ वसूली या अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, बिना बिजली आपूर्ति के जारी किए गए सभी बिल तत्काल निरस्त किए जाएं, गांव का शीघ्र विद्युतीकरण कराया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।
यह मामला बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर सरकार हर घर तक बिजली पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सोनभद्र के आदिवासी क्षेत्रों में ऐसे परिवार भी हैं जिन्हें आज तक बिजली नसीब नहीं हुई, लेकिन उनके नाम पर वर्षों से हजारों रुपये के बिजली बिल जारी किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।