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मीरजापुर में महिला-पुरुष मतदाताओं के बीच बड़ा अंतर, लिंग अनुपात पर भी उठे सवाल

मीरजापुर में महिला-पुरुष मतदाताओं के बीच बड़ा अंतर, लिंग अनुपात पर भी उठे सवाल


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय

8382048247

मीरजापुर में महिला-पुरुष मतदाताओं के बीच बड़ा अंतर, लिंग अनुपात पर भी उठे सवालमीरजापुर। जनपद में प्रकाशित नवीनतम मतदाता सूची ने महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच बड़े अंतर को उजागर किया है, जिसके साथ ही लिंग अनुपात को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले में पुरुष मतदाताओं की संख्या 8,55,675 है, जबकि महिला मतदाता 7,11,825 हैं। इस प्रकार करीब 1,43,850 का अंतर सामने आया है, जो चिंता का विषय बन गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल मतदाता सूची का अंतर नहीं, बल्कि कहीं न कहीं लिंग अनुपात की स्थिति की ओर भी संकेत करता है। यदि जनसंख्या में महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है या मतदाता सूची में उनका पंजीकरण कम हो रहा है, तो दोनों ही स्थितियां गंभीर मानी जाएंगी।

 

 

मीरजापुर में महिला-पुरुष मतदाताओं के बीच बड़ा अंतर, लिंग अनुपात पर भी उठे सवाल

 

मीरजापुर में महिला-पुरुष मतदाताओं के बीच बड़ा अंतर, लिंग अनुपात पर भी उठे सवाल

 

मीरजापुर। जनपद में प्रकाशित नवीनतम मतदाता सूची ने महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच बड़े अंतर को उजागर किया है, जिसके साथ ही लिंग अनुपात को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले में पुरुष मतदाताओं की संख्या 8,55,675 है, जबकि महिला मतदाता 7,11,825 हैं। इस प्रकार करीब 1,43,850 का अंतर सामने आया है, जो चिंता का विषय बन गया है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल मतदाता सूची का अंतर नहीं, बल्कि कहीं न कहीं लिंग अनुपात की स्थिति की ओर भी संकेत करता है। यदि जनसंख्या में महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है या मतदाता सूची में उनका पंजीकरण कम हो रहा है, तो दोनों ही स्थितियां गंभीर मानी जाएंगी।

 

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, महिलाओं का नाम जुड़वाने में उदासीनता, दस्तावेजों की समस्या और सामाजिक कारणों को इस अंतर की प्रमुख वजह बताया जा रहा है। कई मामलों में विवाह के बाद महिलाओं का नाम स्थानांतरण समय से नहीं हो पाता, जिससे वे सूची से बाहर रह जाती हैं।

 

हालांकि निर्वाचन विभाग द्वारा पुनरीक्षण अभियान के दौरान घर-घर सत्यापन और विशेष शिविर आयोजित किए गए, लेकिन इसके बावजूद महिला मतदाताओं की संख्या कम रहना चिंता को बढ़ाता है। जानकारों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी प्रभावित हो सकती है।प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में महिला मतदाताओं के पंजीकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। वहीं सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति सजग होने और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की अपील की है।आगामी चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा और अहम हो गया है, क्योंकि महिला मतदाताओं की भागीदारी न केवल चुनावी परिणामों को प्रभावित करती है, बल्कि समाज में संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा भी तय करती है।


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