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मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़े का आरोप, ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़े का आरोप, ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

बभनी (सोनभद्र)। विकासखंड बभनी अंतर्गत ग्राम पंचायत बरवाटोला ‘क’ में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक पर मिलीभगत कर मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता, फर्जी हाजिरी और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में वन वाटिका की साफ-सफाई तथा बाउली (कुएं) की सफाई के नाम पर मनरेगा के तहत कार्य दिखाए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर काम नगण्य या बिल्कुल नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि कई मजदूर सुबह कार्यस्थल पर पहुंचकर मात्र हाजिरी लगाते हैं और कुछ ही देर बाद वापस घर लौट जाते हैं, लेकिन रिकॉर्ड में उनकी पूरे दिन की उपस्थिति दर्ज कर दी जाती है।

ग्रामीणों के अनुसार, मनरेगा की ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के तहत मजदूरों की स्कैनिंग और फोटो अपलोड होने के बाद भी वास्तविक कार्य नहीं कराया जाता। इसके बावजूद संबंधित लोगों को मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि मस्टर रोल में कुछ ऐसे व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने कभी मनरेगा कार्य में हिस्सा ही नहीं लिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन कुछ जिम्मेदार लोगों की कथित मिलीभगत से योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कार्यों का सत्यापन किए बिना ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।

ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं कराई गई तो वे संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने के साथ-साथ जन आंदोलन करने को भी बाध्य होंगे।

वहीं, ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मनरेगा कार्यों की नियमित निगरानी और स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक पात्र मजदूरों तक पहुंचे और सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है और सच्चाई सामने लाने के लिए क्या कदम उठाता है।


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