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अधिवक्ता राजेश यादव की मौत में एक नया मोड़।  तत्कालीन पुलिस के कार्यप्रणाली पर उठ रहे प्रश्न चिन्ह। 

अधिवक्ता राजेश यादव की मौत में एक नया मोड़।  तत्कालीन पुलिस के कार्यप्रणाली पर उठ रहे प्रश्न चिन्ह। 


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

  चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

सोनभद्र, घटना 8/12/2025 की है जब सुनियोजित तरीके से अधिवक्ता राजेश यादव की मौत करा दी जाती है। वहीं मृतक पक्ष से थाना घोरावल पर तहरीर दी जाने के बाद पुलिस द्वारा काफी टाल मटोल करने के पश्चात प्राथमिकी पंजीकृत किया जाता है। तत्कालीन थाने पर तैनात इंस्पेक्टर विनोद यादव एवं क्राइम S,H,O शमशेर यादव तथा सीओ घोरावल राहुल पांडे विपक्षी के प्रभाव में आकर घटना को पूर्ण रूप से एक्सीडेंट का अमलीजामा पहनाने में सफल रहे।

मजेदार बात यह है की घटना को एक्सीडेंट का रूप देने के लिए विपक्षी द्वारा सुनियोजित प्लानिंग के तहत ऐसा जघन्य अपराध किया गया, जिसे पुलिस ने इसे आसानी से एक्सीडेंट का मुर्त रूप दे दिया।

मामले में नया रोचक तथ्यान्वेषण तब आता है जब मृतक के भाई द्वारा लगातार न्याय की आस में न्याय प्रिय कप्तान के यहां प्रयास करने पर पुनः विवेचना का आदेश किया जाता है।

वर्तमान घोरावल इंस्पेक्टर बृजेश सिंह द्वारा इसकी जांच की गई तो, पूर्व में की गई जांच तार तार होते नजर दिखे।

इंस्पेक्टर बृजेश सिंह ने जांच में पाया कि प्री प्लानिंग के तहत यह घटना सुनियोजित तरीके से की गई एक हत्या है।

मृतक के भाई दिनेश कुमार यादव का कहना है कि उसके भाई के निर्मम तरीके से हुई मौत में मंगल पाल, निसार अहमद, चंद्रशेखर विश्वकर्मा, अशोक मांझी राणा सर्वेंद्र राव अंबेडकर उर्फ रमेश है जिसमें मंगल पाल व अशोक मांझी पर पुलिस कप्तान द्वारा25.000 हजार का इनाम भी घोषित किया गया है।

घटना के बाबत मृतक के भाई का कहना है कि उक्त घटना में जो मुख्य अपराधी है उन्हें बचाने में सीओ घोरावल की अहम भूमिका है खानापूर्ति के लिए उस समय तैनात स्पेक्टर व सीओ के द्वारा घटना को एक्सीडेंट दिखाकर मुख्य आरोपी मंगल पाल के फुफेरे भाई अभय पाल को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया राणा सर्वेंद्र राव अंबेडकर उर्फ रमेश, चंद्रशेखर विश्वकर्मा, निसार अहमद इन लोगों को coघोरावल राहुल पांडे द्वारा बचाया जा रहा है

मृतक के भाई के अनुसार मंगल पाल अशोक मांझी निसार अहमद तथा चंद्रशेखर विश्वकर्मा के द्वारा अभय पाल को मोहरा बनाकर ऐसा कराया गया।

अब सवाल खड़ा होता है कि जब कप्तान के आदेश पर वर्तमान घोरावल इंस्पेक्टर बृजेश सिंह द्वारा यह सिद्ध कर दिया गया कि राजेश यादव की मौत एक एक्सीडेंट नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से की गई हत्या है तो क्या अब भी C,O घोरावल इस हत्या में शामिल मंगल पाल व अशोक मांझी जिनको पकड़ने के लिए कप्तान द्वारा 25,000 हजार का इनाम भी घोषित किया गया है पुलिस इन्हें पकड़ कर उचित कानूनी कार्यवाही करेगी? या पहले के तरह यह सब अभी भी पुलिस के साथ मिलकर तू चोर मैं सिपाही के तर्ज पर चूहा बिल्ली जैसी आंखमिचौली का खेल जारी रखेंगे।


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