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डीएम के निर्देश के बावजूद रसौली गो-आश्रय स्थल का नहीं हुआ स्थानांतरण

डीएम के निर्देश के बावजूद रसौली गो-आश्रय स्थल का नहीं हुआ स्थानांतरण


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

 

 

100 से कम गोवंश वाले आश्रय स्थलों को बंद करने के आदेश, तीन माह बाद भी कार्रवाई अधर में

मिर्जापुर। जिगना क्षेत्र के रसौली गांव में संचालित निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल को बड़े गो-संरक्षण केंद्र में स्थानांतरित करने के जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन माह बाद भी अमल नहीं हो सका है। आरोप है कि पशुपालन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी उच्चाधिकारियों के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इससे विभाग के अधीनस्थ कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

बताया जाता है कि करीब तीन माह पूर्व जिलाधिकारी ने 100 से कम गोवंश वाले निराश्रित गो-आश्रय स्थलों को बंद कर वहां मौजूद गोवंश को बड़े और व्यवस्थित गो-संरक्षण केंद्रों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। रसौली स्थित आश्रय स्थल भी उस समय इस मानक के दायरे में था, क्योंकि यहां गोवंश की संख्या 100 से कम थी।

रसौली का आश्रय स्थल असंबद्ध गोचर भूमि पर संचालित होने के कारण भी सवालों के घेरे में है। यहां पर्याप्त चारे की उपलब्धता नहीं होने की शिकायत है। वहीं, आश्रय स्थल में मौजूद गोवंश की संख्या के अनुपात में उपलब्ध स्थान भी काफी सीमित बताया जा रहा है। इससे पशुओं की देखरेख और उनके रखरखाव को लेकर भी समस्याएं सामने आ रही हैं।

मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव पशुधन विभाग और निदेशक पशुपालन विभाग की ओर से भी रसौली गो-आश्रय स्थल को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद तीन माह बीतने के बाद भी स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

गोवंश की संख्या बढ़ाने का आरोप

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि आश्रय स्थल में गोवंश की संख्या 100 से कम होने के कारण इसे बंद कर बड़े गो-संरक्षण केंद्र में स्थानांतरित किया जाना था। ऐसे में उच्चाधिकारियों के निर्देशों से बचने के लिए बाद में यहां गोवंश की संख्या बढ़ाने का तरीका अपनाया गया। हालांकि, गोवंश की संख्या बढ़ाए जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा और वर्तमान में आश्रय स्थल में कितने गोवंश हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों और विभागीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिलाधिकारी, अपर मुख्य सचिव पशुधन और निदेशक पशुपालन विभाग के निर्देशों के बावजूद लंबित इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और रसौली गो-आश्रय स्थल को बड़े गो-संरक्षण केंद्र में कब तक स्थानांतरित किया जाता है।

बीडीओ रामपाल ने बताया कि मामले में उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


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