
मानसून में भी नहीं थम रहा अवैध बालू खनन, कनहर और मलिया नदियों में रातभर दौड़ रहे ट्रैक्टर, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
सोनभद्र जनपद के विंढमगंज थाना क्षेत्र में मानसून और पर्यावरणीय प्रतिबंधों के बावजूद कनहर एवं मलिया नदियों से कथित रूप से अवैध बालू खनन का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि रात के अंधेरे में खनन माफिया नियमों की अनदेखी करते हुए नदियों से बालू का अवैध दोहन कर रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन का यह पूरा खेल आधी रात के बाद शुरू होता है। आरोप है कि दिन के समय खनन से जुड़े लोग झारखंड सीमा से लगे गांवों में ग्राहकों की तलाश करते हैं और ऑर्डर मिलने के बाद देर रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को कनहर और मलिया नदी में उतार दिया जाता है। इसके बाद पूरी रात बालू निकाली जाती है और सुबह लगभग सात बजे तक यह गतिविधि जारी रहती है। सुबह होते ही ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू को विभिन्न स्थानों तक पहुंचा दिया जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानसून के दौरान नदियों से खनन पर प्रतिबंध होने के बावजूद यह गतिविधियां लगातार जारी हैं। उनका कहना है कि इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव आ रहा है, जलधारा प्रभावित हो रही है और नदी किनारे रहने वाले लोगों के सामने कटान तथा पर्यावरणीय संकट की आशंका बढ़ती जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिम्मेदार विभागों की कथित लापरवाही के कारण अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। उनका कहना है कि यदि नियमित रूप से रात में संयुक्त अभियान चलाया जाए और नदी क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए, तो इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
क्षेत्र के लोगों ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं खनन विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, रात में विशेष अभियान चलाने, अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा कनहर और मलिया नदियों के पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।