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हाई कोर्ट का सख्त आदेश अदालत में बहस का अधिकार सिर्फ पंजीकृत वकीलों को — पावर ऑफ अटॉर्नी धारकों पर रोक
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
8382048247
प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया है कि अदालतों में बहस करने का अधिकार केवल विधिवत पंजीकृत अधिवक्ताओं को ही है। कोर्ट ने एडवोकेट्स एक्ट 1961 का हवाला देते हुए कहा कि पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) धारक किसी भी स्थिति में अधिवक्ता की भूमिका निभाते हुए कोर्ट में बहस नहीं कर सकते।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा और पेशेवर मानकों को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि केवल योग्य और पंजीकृत वकील ही पक्षकारों की ओर से दलील पेश करें।
इस फैसले से उन मामलों पर सीधा असर पड़ेगा, जहां अब तक पावर ऑफ अटॉर्नी धारक अदालत में पेश होकर बहस करते थे। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
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