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दुद्धी में 8 वर्षीय बालक को विषैले सांप ने डसा, समय पर इलाज मिलने से बची जान

दुद्धी में 8 वर्षीय बालक को विषैले सांप ने डसा, समय पर इलाज मिलने से बची जान


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

सोनभद्र। दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के दिघुल गांव में मंगलवार देर रात एक 8 वर्षीय मासूम बालक को घर के बाहर निकलते समय विषैले सांप ने डस लिया। घटना के बाद बालक की हालत तेजी से बिगड़ने लगी, जिससे परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने बिना समय गंवाए बच्चे को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) दुद्धी पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। समय पर इलाज मिलने से बालक की जान बच गई। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और वह चिकित्सकों की निगरानी में भर्ती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायल बालक की पहचान दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के दिघुल गांव निवासी नसरुद्दीन अंसारी के 8 वर्षीय पुत्र मोहम्मद जमील के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि मंगलवार रात जमील किसी काम से घर के बाहर निकला था। घर के दरवाजे के पास झाड़ियों के समीप उसका पैर अनजाने में छिपे हुए एक विषैले सांप पर पड़ गया। इससे सांप ने तत्काल उसके पैर में डस लिया।

सांप के काटते ही जमील दर्द से जोर-जोर से चीखने लगा। उसकी आवाज सुनकर परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे तो उन्होंने सांप को झाड़ियों की ओर तेजी से भागते हुए देखा। घटना के कुछ ही मिनटों बाद बच्चे को चक्कर आने लगे और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने कोई जोखिम न लेते हुए तत्काल निजी वाहन की व्यवस्था की और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी ले गए।

सीएचसी दुद्धी में चिकित्सकों ने बच्चे की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उपचार शुरू किया। डॉक्टरों की तत्परता और समय पर चिकित्सा मिलने से उसकी स्थिति में सुधार हुआ। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल बालक की हालत स्थिर है, हालांकि एहतियात के तौर पर उसे निगरानी में रखा गया है।

बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि घरों के आसपास झाड़ियां साफ रखें, रात के समय बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें तथा सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचकर उपचार कराएं। समय पर चिकित्सकीय सहायता ही ऐसे मामलों में जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।


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