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बारिश और जलजमाव से मिर्च-टमाटर की फसल में गुरचा रोग का प्रकोप, किसान परेशान

बारिश और जलजमाव से मिर्च-टमाटर की फसल में गुरचा रोग का प्रकोप, किसान परेशान


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

सोनभद्र। जिले के ऊंचे और आश्रित क्षेत्र में मिर्च और टमाटर की खेती करने वाले किसान इन दिनों गुरचा रोग के बढ़ते प्रकोप से परेशान हैं। लगातार हो रही बारिश और खेतों में जलजमाव के कारण फसलों में रोग तेजी से फैल रहा है। किसानों का कहना है कि महंगे कीटनाशकों और दवाओं का छिड़काव करने के बावजूद रोग पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।

राबर्ट्सगंज विकासखंड के तेंदु, अमोखर, बभनौली, बकाही, सिरसिया समेत आसपास के सैकड़ों गांवों में बड़ी संख्या में किसान मिर्च और टमाटर की खेती करते हैं। इस समय मिर्च की फसल में फूल आने के साथ उत्पादन शुरू हो गया है और कई किसान बाजार में मिर्च की बिक्री भी करने लगे हैं। इसी बीच गुरचा रोग के प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

किसानों के मुताबिक, गुरचा रोग की शुरुआत में मिर्च के पौधों की पत्तियां ऊपर की ओर मुड़ने लगती हैं या नीचे की तरफ सिकुड़ जाती हैं। धीरे-धीरे पौधे की बढ़वार प्रभावित होने लगती है और उसकी उत्पादकता कम हो जाती है। किसानों का कहना है कि यह रोग एक पौधे से दूसरे पौधे में तेजी से फैल रहा है। बारिश और खेतों में लगातार नमी बने रहने से समस्या और गंभीर हो गई है।

क्षेत्रीय किसान अवधेश कुमार ने बताया कि उन्होंने फसल को रोग से बचाने के लिए कई बार महंगी दवाओं का छिड़काव किया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। उन्होंने बताया कि मिर्च की फसल में फूल और फल आने के समय रोग लगने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इससे खेती में लगाए गए खर्च की भरपाई करना भी मुश्किल हो सकता है।

किसानों का कहना है कि मिर्च और टमाटर की खेती उनके लिए आय का प्रमुख साधन है। ऐसे में रोग के बढ़ते प्रकोप से फसल खराब होने पर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों ने कृषि विभाग से गांवों में विशेषज्ञों की टीम भेजकर फसलों का निरीक्षण कराने, रोग की सही पहचान और प्रभावी दवा की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।

किसानों ने यह भी मांग की है कि जलजमाव वाले खेतों से पानी की निकासी के लिए आवश्यक सलाह और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि रोग के प्रसार को रोका जा सके और फसल को बचाया जा सके।


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