
ड्रमंडगंज घाटी बनी हादसों का हॉटस्पॉट: 6 माह में 14 मौतें, तेज ढलान और ‘जालिम मोड़’ पर उठे सड़क डिजाइन के सवाल
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
ड्रमंडगंज घाटी में लगातार सड़क हादसे
लालगंज/मीरजापुर। वाराणसी-मीरजापुर-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग-135 पर स्थित ड्रमंडगंज पहाड़ी की खतरनाक ढलान और तीखे मोड़ लगातार सड़क हादसों का कारण बनते जा रहे हैं। ड्रमंडगंज घाटी में बने तेज ढलान और चर्चित ‘जालिम मोड़’ पर आए दिन हो रहे हादसों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था और सड़क के डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
28 मार्च से 6 सितंबर के बीच इस घाटी में हुए बड़े सड़क हादसों में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें कई हादसों का कारण वाहनों का ब्रेक फेल होना बताया गया है। लगातार हो रही घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों में भय का माहौल है तथा खतरनाक ढलान और मोड़ों पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जाने की मांग तेज हो रही है।
ड्रमंडगंज घाटी में सबसे भीषण हादसा 22 अप्रैल को हुआ था। पहाड़ी की तेज ढलान पर एक ट्रक का ब्रेक फेल हो गया था, जिसके बाद ट्रक अनियंत्रित होकर बोलेरो, कार और अन्य वाहनों से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो में आग लग गई। आग की चपेट में आने से बोलेरो में सवार 11 लोगों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।
इससे पहले 28 मार्च को भी ड्रमंडगंज घाटी में ब्रेक फेल होने के बाद एक कंटेनर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में कंटेनर चालक 35 वर्षीय अरविंद कुमार और लालता यादव की मौत हो गई थी।
वहीं, हादसों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। 6 सितंबर को एक बार फिर ब्रेक फेल होने के बाद पिकअप वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 36 वर्षीय चालक रावेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग की इस पहाड़ी सड़क को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। लोगों का कहना है कि ड्रमंडगंज घाटी की तेज ढलान, तीखे मोड़ और ‘जालिम मोड़’ के आसपास की सड़क व्यवस्था की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने, ब्रेक जांच की व्यवस्था, चेतावनी संकेतक, रंबल स्ट्रिप, आपातकालीन सुरक्षा उपाय और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की मांग की जा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि लगातार जानलेवा साबित हो रही ड्रमंडगंज घाटी में हादसों को रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग कब ठोस और स्थायी कदम उठाएंगे? 28 मार्च से 6 सितंबर के बीच 14 लोगों की मौत के बाद भी यदि सड़क सुरक्षा व्यवस्था में प्रभावी सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह खतरनाक ढलान और तीखे मोड़ फिर किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।