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आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल से स्वास्थ्य अभियानों पर संकट, दस्तक अभियान के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ली जाएगी मदद 

आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल से स्वास्थ्य अभियानों पर संकट, दस्तक अभियान के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ली जाएगी मदद 


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

 

सोनभद्र में मांगों को लेकर आशाओं का आंदोलन जारी, अर्बन पीएचसी पर प्रदर्शन कर सरकार को दी चेतावनी; सीएमओ के निर्देश के बाद वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी

सोनभद्र। जिले में आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण अभियानों पर भी दिखाई देने लगा है। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत कड़ी मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के कार्य बहिष्कार से संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक अभियान के संचालन को लेकर विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे अभियान को जारी रखने की तैयारी में जुट गया है। जिन क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता हड़ताल के कारण काम नहीं कर रही हैं, वहां अभियान से संबंधित जिम्मेदारियां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से पूरी कराने की तैयारी की जा रही है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश कुमार मिश्रा की ओर से जारी निर्देश के बाद जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्ययोजना में बदलाव के संकेत मिले हैं। एक ओर विभाग सरकारी स्वास्थ्य अभियानों को प्रभावित होने से बचाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही आशा कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी लगातार सामने आ रही है। ऐसे में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग के लिए अभियान की गतिविधियों को जारी रखना जरूरी है, तो वहीं आशा कार्यकर्ताओं की मांगों और उनकी समस्याओं का समाधान निकालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

सीएमओ कार्यालय के सामने आशाओं ने किया प्रदर्शन, कहा- अब आश्वासन नहीं, अधिकार चाहिए

आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल के बीच बुधवार को नगर स्थित अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (अर्बन पीएचसी) पर शहरी आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष मंजू मौर्या के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी समस्याओं को उठाते हुए सरकार से मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील की।

आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को लेकर आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन अब वे केवल आश्वासन या प्रलोभन से संतुष्ट होने वाली नहीं हैं। उन्हें अपनी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप अधिकार तथा मांगों का ठोस समाधान चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन को लेकर उनका रुख स्पष्ट रहेगा।

प्रदर्शन में रेखा, शांति, रेखा देवी, लक्ष्मी और अनुराधा सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं। कार्यकर्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। उनके प्रदर्शन से यह स्पष्ट हो गया कि हड़ताल केवल कार्य बहिष्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से वे शासन और स्वास्थ्य विभाग तक अपनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाना चाहती हैं।

हड़ताल वाले क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से काम कराने के निर्देश

आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल के बीच स्वास्थ्य विभाग ने संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान को जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू कर दिया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश कुमार मिश्रा ने शासन स्तर से प्राप्त निर्देशों के क्रम में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि दस्तक अभियान के दौरान जिन क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता हड़ताल पर हैं और कार्य नहीं कर रही हैं, वहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से अभियान से संबंधित कार्य कराना सुनिश्चित किया जाए।

सीएमओ के मुताबिक, राज्य मुख्यालय स्तर पर आयोजित जूम बैठक के दौरान इस संबंध में निर्देश प्राप्त हुए थे। इसके बाद जिले में अभियान की गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। विभाग का प्रयास है कि आशा कार्यकर्ताओं की अनुपस्थिति के कारण अभियान का काम पूरी तरह बाधित न हो और निर्धारित गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सके।

हालांकि, इस व्यवस्था के सामने व्यावहारिक चुनौतियां भी हो सकती हैं। आशा कार्यकर्ता लंबे समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम करती रही हैं। उन्हें स्थानीय परिवारों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों वाले लोगों से सीधा संपर्क बनाए रखने का अनुभव है। ऐसे में उनके कार्य बहिष्कार के दौरान दूसरे विभाग की कार्यकर्ताओं से जिम्मेदारी पूरी कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

आशाओं की भूमिका पर निर्भर हैं कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम

आशा कार्यकर्ताओं को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी माना जाता है। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने, प्रसव पूर्व जांच के प्रति जागरूक करने, नवजात शिशुओं की देखभाल, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, स्वास्थ्य जागरूकता और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

इसके अतिरिक्त संचारी रोगों की रोकथाम, साफ-सफाई के प्रति जागरूकता, बुखार या अन्य लक्षणों वाले लोगों की पहचान तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में भी आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की मदद करती हैं। गांवों में कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और आम नागरिकों के बीच संवाद स्थापित करने में उनकी भूमिका निर्णायक होती है।

यही वजह है कि आशा कार्यकर्ताओं का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार अब विभागीय कामकाज के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। जब स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में उनकी भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है, तो उनके लंबे समय तक काम से दूर रहने का असर जमीनी स्तर पर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

वैकल्पिक व्यवस्था से कितना निकलेगा समाधान?

स्वास्थ्य विभाग की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद लेने की तैयारी को तत्कालीन परिस्थितियों में अभियान जारी रखने का प्रयास माना जा रहा है। लेकिन इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या केवल वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे लंबे समय तक स्वास्थ्य अभियानों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है? क्या दूसरे विभाग की कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालने से आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल से पैदा हुई समस्या का स्थायी समाधान निकल पाएगा?

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अपनी जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में उन्हें अतिरिक्त कार्य सौंपते समय उपलब्ध मानव संसाधन, प्रशिक्षण, समय और काम के बंटवारे जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। अभियान को केवल कागजों पर जारी दिखाने के बजाय यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।

स्वास्थ्य विभाग के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि हड़ताल के बावजूद जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। वहीं शासन और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि आंदोलन के कारणों को समझते हुए आशा कार्यकर्ताओं की मांगों पर संवाद और समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।

मांगों के समाधान के बिना आंदोलन समाप्त होने के आसार पर सवाल

आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और हड़ताल से यह संकेत मिलता है कि उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए ठोस पहल की जरूरत है। केवल निर्देश जारी करके या वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था बनाकर तत्कालीन कामकाज को आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इससे कर्मचारियों की मांगों से जुड़ा मूल विवाद अपने आप समाप्त नहीं होगा।

यदि हड़ताल लंबी खिंचती है, तो स्वास्थ्य विभाग के अन्य कार्यक्रमों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में परेशानी बढ़ सकती है, जहां स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं पर अधिक निर्भरता है।

ऐसे में जरूरत इस बात की है कि शासन, स्वास्थ्य विभाग और आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं के बीच सार्थक बातचीत हो। उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाया जाए और समाधान की दिशा में समयबद्ध पहल की जाए। इससे एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी, तो दूसरी ओर कर्मचारियों के बीच विश्वास बहाल करने का रास्ता भी खुल सकता है।

अब निगाहें शासन और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। एक तरफ आशा कार्यकर्ता अपने अधिकारों और मांगों को लेकर आंदोलन कर रही हैं, तो दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान को जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग अभियान को किस तरह आगे बढ़ाता है और आशा कार्यकर्ताओं की मांगों के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।


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