
हनुमान मंदिर में खिचड़ी का विशाल भंडारा, न कोई अमीर, न कोई गरीब की भावना को मिल रहा बल
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
8382048247
*ओबरा 17वें शनिवार भी जारी रहा खिचड़ी का विशाल भंडारा*
*हनुमान मंदिर बना सेवा का केंद्र, पत्रकार अजीत सिंह की पहल ने कायम की न कोई अमीर, न कोई गरीब की मिसाल*
*समाज सेवा की मिसाल बने पत्रकार अजीत सिंह, शिक्षा से लेकर राहत सामग्री तक पहुंचा रहे मदद*
ओबरा, सोनभद्र। समाज में समानता, भाईचारे और निस्वार्थ सेवा की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, ओबरा के सुभाष तिराहे पर स्थित हनुमान मंदिर में प्रत्येक शनिवार को खिचड़ी का भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन सेवाभाव का एक छोटा सा प्रयास है, जिसका 17वां शनिवार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसका मुख्य ध्येय समाज में न कोई अमीर, न कोई गरीब की भावना को स्थापित करना है। इस नेक पहल के माध्यम से, सभी लोग चाहे उनकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो बिना किसी भेदभाव के एक साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस भंडारे की शुरुआत पत्रकार अजीत सिंह की एक छोटी सी पहल के रूप में हुई थी, जिनका मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। उनका दृढ़ विश्वास है कि जब मानव ही मानव की सेवा करेगा, तभी समाज में सच्ची एकता स्थापित हो पाएगी। यह आयोजन अब केवल एक धार्मिक कार्यक्रम न रहकर, समाज को एक साथ लाने और सबको एक का संदेश देने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। समिति के संस्थापक अजीत सिंह ने अपनी सेवा का दायरा भंडारे से भी आगे बढ़ाया है। एक कलमकार (पत्रकार) होने के नाते, उन्होंने समाज की दुर्व्यवस्थाओं पर ध्यान देने के साथ ही उन लोगों पर भी नजर डाली, जो बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर शिक्षा, से वंचित हैं। शिक्षा के महत्व को समझते हुए, अजीत सिंह आदिवासी गरीब बच्चों के लिए कॉपी-किताब, पेन-पेंसिल जैसी जरूरी सामग्री की व्यवस्था कर उनका वितरण करते हैं। उन्होंने महसूस किया कि गरीब बच्चों और वृद्धाश्रम के लिए भी प्रयास आवश्यक है। दीपावली जैसे पावन पर्व पर, उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर वृद्धाश्रमों, गरीब परिवारों और अनाथ बच्चों के बीच मिठाइयों का वितरण किया। इस दौरान, उन्होंने बुजुर्गों से बातचीत की और उन्हें अपना होने का एहसास दिलाया। पत्रकार अजीत सिंह की मानवीय पहल केवल त्योहार तक सीमित नहीं है। मूसलाधार बारिश और कड़ाके की ठंड के कठिन समय में भी उनकी सेवा जारी रहती है। जिन गरीबों और बेसहारा लोगों के कच्चे और मिट्टी के घर ढह गए थे या जिनकी छतें टपक रही थीं, उन तक तिरपाल लेकर अजीत सिंह ने स्वयं राहत सामग्री पहुँचाने का बीड़ा उठाया।
ठंड के दिनों में, वह गरीबों और ज़रूरतमंदों के बीच जाकर कंबल का वितरण भी करते हैं। पत्रकार अजीत सिंह वर्षों से इसी तरह के निस्वार्थ सेवा कार्य करते हुए आ रहे हैं और समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बने हैं। प्रत्येक शनिवार को होने वाले खिचड़ी के भंडारे में संस्थापक के पिता श्री बाबूराम सिंह के हाथों प्रसाद का वितरण किया जाता है। इस नेक कार्य को सफल बनाने के लिए संरक्षक ओमप्रकाश सिंह, संकट मोचन झा, सर्वेश दुबे, सरिता सिंह, पुष्पा दुबे, रीता कुमारी, राजू श्रीवास्तव, सुनील दत्ता ,दीपक माली, विनोद तिवारी, रणजीत तिवारी, राम आश्रय बिंद, आलोक पांडे, बाबूलाल, मनोज, सभी साथियों के साथ मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में लगे हैं आपको बताते चलें 17 वा शनिवार को साथ देने आए (गार्जियन) धीरेन्द्र शर्मा और बड़े भाई श्यामू गौड़, शुभम कुशवाहा, जैसे गणमान्य व्यक्तियों का सहयोग मिल रहा है। और सेवा भाव से इस सामाजिक कार्यक्रम को और भी सार्थक बना दिया है।