
शिव महापुराण कथा का वर्णन किया कथा वाचक देवी चंद्रमुखी ने
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
ब्यूरो चीफ : रिजवान सिद्दीकी
झालू। बृहस्पतिवार को ग्राम धर्मपुरा में स्थित झारखण्डी शिव मंदिर में आयोजित सप्तदिवसीय शिव महापुराण कथा में कथा वाचक व्यास देवी चंद्रमुखी ने कथा में कार्तिकेय जन्म, गणेश जन्म व कार्तिकेय द्वारा तारकासुर का वध के प्रसंग सुनाए। कार्तिकेय जन्म का वर्णन करते हुए कहा भगवान सिर्फ एक अवैध विदुर थे। जो अभी भी अपनी पत्नी के शोक मना रहे थे। राक्षस तारकासुर ने भगवान ब्रह्मा से वरदान मांगा कि वह केवल भगवान शिव के अपने पुत्रों में से एक के द्वारा मारा जा सकेगा। तारकासुर का मानना था कि शिव कभी दोबारा शादी नहीं करेंगे या बच्चे पैदा नहीं करेंगे। शिव जी के शुक्र से कार्तिकेय का जन्म हुआ। सबने मिलकर बालक का नाम कार्तिकेय रखा। कार्तिकेय अतुलित बलशाली थे। उन्होंने छह मुखों से स्तनपान किया। देवता बार-बार शंकरजी से आराधना कर रहे थे। कार्तिकेय ने तारकासुर का वध की कथा का श्रद्धालुओं को रसपान कराया। कथावाचक व्यास प्रेरणा ज्योति ने कहा की शिव पुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती ने स्नान से पूर्व शरीर पर हल्दी का उपन्यास था जिसके बाद उन्होंने इस तरह भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई। इसके बाद माता पार्वती स्नान करने चली गई और गणपति को आदेश दिया कि तुम द्वार पर बैठ जाओ किसी को अंदर मत आने देना। कथा का बहुत ही भक्तिभाव के साथ उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रवण किया। कथा में श्रद्धालुओं ने नृत्य कर भगवान भोलेनाथ के जय घोष लगाए। जिसके बाद परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा में डॉ धर्मवीर सिंह, सूरज सिंह, लटूर सिंह, प्रमिला, ज्योति, मोहित, कवि, विशांत, सतेन्द्र, टीकम, बृजेश, आशा, अनिता, सत्यपाल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।