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बिल्लीमारकुंडी खनन क्षेत्र में प्रदूषण का कहर: 3 दर्जन खनन पट्टों के बीच मेडिकल सुविधा नदारद, रात्रि में चल रहे क्रशरों पर उठे सवाल

बिल्लीमारकुंडी खनन क्षेत्र में प्रदूषण का कहर: 3 दर्जन खनन पट्टों के बीच मेडिकल सुविधा नदारद, रात्रि में चल रहे क्रशरों पर उठे सवाल


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

 

 

चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय

8382048247

डाला/सोनभद्र। बिल्लीमारकुंडी खनन क्षेत्र में प्रदूषण की मार झेल रहे स्थानीय निवासियों का जीवन दिन-प्रतिदिन दूभर होता जा रहा है। क्षेत्र में लगभग 35 के करीब खनन पट्टे स्वीकृत हैं, लेकिन नियमानुसार आम जनता के स्वास्थ्य संरक्षण हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं धरातल पर दिखाई नहीं दे रहीं।

नियमों के अनुसार प्रत्येक खनन पट्टेदार द्वारा क्षेत्र में कम से कम एक दिन का मेडिकल कैम्प आयोजित कर प्रदूषण से प्रभावित लोगों का उपचार कराना अनिवार्य है। साथ ही उत्तर प्रदेश खनिज परिहार नियमावली में यह भी स्पष्ट प्रावधान है कि खनन गतिविधियों से प्रभावित आमजन के स्वास्थ्य संबंधी दायित्व खनन पट्टेदार की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद क्षेत्र में न तो नियमित मेडिकल कैम्प लगाए जा रहे हैं और न ही स्थायी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड से क्षेत्र में एक अस्पताल का निर्माण कर दिया जाए और उसके संचालन, डॉक्टर व अन्य खर्च का वहन खनन पट्टेदारों से कराया जाए तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, बल्कि प्रभावित जनता के प्रति न्यायपूर्ण कदम होगा।

सबसे गंभीर आरोप रात्रिकालीन प्रदूषण को लेकर है। क्षेत्र में क्रशर मशीनें रात में भी संचालित हो रही हैं, जबकि स्थानीय नागरिकों का दावा है कि रात्रि में क्रशर संचालन के लिए कोई स्पष्ट वैधानिक अनुमति नहीं है। रातभर उड़ती धूल और तेज शोर से बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि लगभग छह वर्ष पूर्व इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय नागरिकों ने तत्कालीन समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव गोंड से कई बार शिकायत व प्रदर्शन किया था, जिसके बाद कुछ समय के लिए रात्रि में चल रहे क्रशर बंद कराए गए थे। लेकिन मंत्री के व्यस्त होते ही स्थिति पुनः पहले जैसी हो गई और प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ गया।

अब क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रात्रिकालीन क्रशर संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, नियमित मेडिकल कैम्प सुनिश्चित किए जाएं तथा DMF फंड से स्थायी अस्पताल की स्थापना कर खनन कंपनियों से उसका खर्च वहन कराया जाए।

प्रशासन की चुप्पी के बीच बिल्लीमारकुंडी के लोग आज भी स्वच्छ हवा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की आस में हैं।


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