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विंध्याचल कस्बा में बिगड़ी कानून व्यवस्था?? दलित युवक की मौत, नशीले पदार्थों का कारोबार और पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

विंध्याचल कस्बा में बिगड़ी कानून व्यवस्था?? दलित युवक की मौत, नशीले पदार्थों का कारोबार और पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

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प्रसिद्ध धार्मिक नगरी और प्रमुख शक्तिपीठों में शुमार विंध्याचल की फिजाओं में इन दिनों भारी तनाव और असंतोष का माहौल है। जिस पावन धरती पर लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ शीश नवाते हैं, वहीं आज बिगड़ती कानून व्यवस्था, दलितों के साथ उत्पीड़न, नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और खूनी संघर्षों ने स्थानीय जनता के मन में भय और आक्रोश भर दिया है। कभी सौहार्द और सुरक्षा के लिए जानी जाने वाली इस नगरी में वर्तमान हालात ने पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

हाल ही में विंध्याचल क्षेत्र में एक दलित नौजवान की बेरहमी से पिटाई के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके विरोध में उग्र परिजनों और स्थानीय लोगों को चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा। इतना ही नहीं, आए दिन दलितों पर हमले और मारपीट की घटनाएं आम हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, कस्बे में खुलेआम बिकने वाले नशीले पदार्थ और जहरीली पुड़ियां नौजवानों की जिंदगी निगल रही हैं। अति-सुरक्षित क्षेत्र माने जाने वाले गंगा घाटों और चौराहे पर आए दिन तीर्थ यात्रियों के साथ क्या हो रहा है पता करने की जरूरत है ?तीर्थ पुरोहितों के बीच संघर्ष हो रहे हैं, तो वहीं जुआ और अवैध गतिविधियों का संचालन बिना किसी खौफ के जारी है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि मिर्जापुर का जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और आला अधिकारी इस स्थिति से बेखबर नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में सरकार की इतनी सशक्त मौजूदगी होने के बाद भी – जहां इसी विंध्याचल क्षेत्र का नेतृत्व मंत्री और माननीय विधायक करते हैं – प्रशासनिक महकमा और राजनीतिक तंत्र पूरी तरह से संवेदनहीन बना हुआ है। पीड़ित दलित परिवार की चौखट तक सांत्वना देने कोई नहीं पहुंचा, जिससे आम जनमानस में भारी निराशा है।

गंगा घाटों पर दर्शनार्थियों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है और पूरा कस्बा भय के साये में जीने को विवश है। जनता सवाल उठा रही है कि जब डीआईजी और पुलिस अधीक्षक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की नाक के नीचे कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं, तब विंध्याचल को इस गर्त में ढकेलने का जिम्मेदार कौन है? क्या विंध्याचल की प्रशासनिक व्यवस्था वाकई गहरी नींद में सो चुकी है या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?


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