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पांच राज्यों में हुई साइबर ठगी के 20 करोड़ रुपये जालसाजों ने मिर्जापुर में खपाए

पांच राज्यों में हुई साइबर ठगी के 20 करोड़ रुपये जालसाजों ने मिर्जापुर में खपाए


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

मिर्जापुर। मिर्जापुर साइबर ठगों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गया है। बीते कुछ महीने पहले हुई साइबर ठगी के मामले की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के हाथ कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में हुई 20 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के रुपयों को मिर्जापुर के विभिन्न बैंक खातों में जमा करके निकाला गया। एक खाते में 11 करोड़ से ज्यादा रुपए जमा किए गए। इसी तरह एक खाते में तीन करोड़ तो एक अन्य खाते में दो करोड़ से ज्यादा की धनराशि जमा की गई।देहात कोतवाली पुलिस ने साइबर अपराध से अर्जित रुपये को दूसरे के खाते में जमा कराने वाले गिरोह के सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू की है। दिलीप विश्वकर्मा की तहरीर पर पांच अक्तूबर को रजनीश मिश्रा निवासी भुईली पांडेय थाना पड़री, विकास यादव निवासी दुबेपुर थाना पड़री, शिवम सिंह निवासी प्रेमापुर थाना चुनार, संदीप सिंह निवासी टकटकपुर खैरा निवासी कछवां, निखिल सिंह निवासी फुलहा थाना चुनार, अरमान सिंह निवासी प्रेमापुर थाना चुनार, सोनू निवासी जोमनपुर थाना कछवां के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके जांच कर रही है।देहात कोतवाल अमित मिश्रा ने बताया कि छानबीन में पुलिस को चुनार निवासी संदीप पटेल नाम के दो खाते एचडीएफसी बैंक में मिले हैं। इसमें 11 करोड़ का लेन-देन हुआ है। संदीप के खाते में चार करोड़ 45 लाख 73 हजार रुपये, दो करोड़ 66 लाख 32 हजार व 2 करोड़ 66 लाख 35 हजार रुपये एक बार में जमा किए गए हैं।

100 से ज्यादा खाते पुलिस की रडार पर, बैंकों से मांगी गई जानकारी

पुलिस की रडार पर 100 से ज्यादा खाते हैं। 30-35 खाते आरोपियों के परिजनों के भी हैं। पुलिस इनको संदिग्ध मानकर जांच कर रही है। उनके रिश्तेदारों के खाते में भी बड़ी मात्रा में लेन-देन की जानकारी मिली है। मुकदमा दर्ज होने के दौरान चुनार क्षेत्र में सड़क के किनारे बैंक के पासबुक, एटीएम और चेकबुक फेंके मिले थे।

2017 से शुरू हुआ खेल, 2023 में पकड़ी रफ्तार

बैंक एकाउंट की छानबीन में 2017 से पैसों का लेनदेन पाया गया है। साल 2023 से इसमें तेजी आई। साइबर ठगी से संबंधित गैंग ने पैसों के ट्रांजैक्शन के लिए क्षेत्र के जरूरतमंद और गरीब लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके बैंकों में पैसे की जमा निकासी कराई। पांच अक्तूबर को दिलीप विश्वकर्मा ने तहरीर देकर बताया कि वह मोटर बाइंडिंग का काम करता है। दुकान के पास ही रजनीश मिश्रा निवासी भुईली पांडेय थाना पड़री की बीज की दुकान है। विकास यादव निवासी दूबेपुर थाना पड़री रजनीश मिश्रा की गाड़ी चलाता है। दो महीने पहले ये दोनों लोग उसे विश्वास में लेकर साजिश के तहत उसका एक बैंक खाता कोटक महेंद्रा बैंक की तरकापुर शाखा में खोलवाया था। उस बैंक खाते में आठ लाख रुपये का ट्रांजेक्शन किया। कुछ और लोगों ने भी शिकायत दर्ज कराई है। एचडीएफसी, आईडीबीआई, एक्सिस के अलावा पेटीएम से पैसों का लेन देन पाया गया है।

कई राज्यों से जुड़े साइबर ठगी के तार, संलिप्त तीन आरोपी दुबई फरार

जिन बैंक खातों में रुपयों का लेन देन मिला है उनका सीधे इस्तेमाल कम हुआ है। इन बैंक खातों का इस्तेमाल पीड़ित के खाते से पैसे उड़ाने के बाद विभिन्न बैंक खातों का प्रयोग करने के बाद आखिरी में पैसों को सही ठिकाने पर पहुंचाने के लिए किया गया। सबसे ज्यादा गोवा और महाराष्ट्र में हुई साइबर ठगी से प्राप्त रुपयों को इसमें स्थानांतरित किया गया। इसके इलावा तमिलनाड़ु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना व आस पास के क्षेत्रों में हुई साइबर ठगी के पैसे भी यहां जमा कराए गए। पुलिस का मानना है कि दुबई से यह गैंग संचालित होता था। दो तीन आरोपियों के दुबई भागने की आशंका है।

गेम ऐप और डिजिटल अरेस्ट से आए पैसे

गेम ऐप और डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से लोगों के साथ गैंग के सदस्य ठगी करते थे। गेम ऐप पर रिचार्ज के नाम पर दो बार कोड खुलते थे। स्कैन करते ही बैंक से पैसे गायब हो जाते थे। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट में भोले भाले लोगों को फंसाकर पैसे ऐंठे जाते थे। बाद में विभिन्न खातों के माध्यम से उसे गैंग के आकाओं तक पहुंचा दिया जाता था।


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