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एक मामले पर उपजिलाधिकारी मड़िहान के ऐतिहासिक कार्यवाही पर न्याय प्रणाली पर बना गहरा विस्वास

एक मामले पर उपजिलाधिकारी मड़िहान के ऐतिहासिक कार्यवाही पर न्याय प्रणाली पर बना गहरा विस्वास


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

 

चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय

8382048247

 

 

 

मड़िहान उपजिलाधिकारी अनेग सिंह के इतिहासिक कार्यवाही से एक पीड़ित युवती को इतिहासिक न्याय मिला है।इस न्याय प्रणाली की चर्चा क्षेत्र के कोने -कोने में हो रही है। मड़िहान थाना क्षेत्र के मटिहानी गाँव निवासी

20 वर्षीय शिवानी पुत्री संत देव ने मड़िहान उपजिलाधिकारी से विगत दिनों फरियाद लगाई थी कि उसके माता के स्वर्गवास के बाद उसके पिता ने दुसरी शादी कर लिया। दुसरी पत्नी से बच्चे होने के बाद सौतेली माँ ने विगत दिनों उसे घर से निकाल दिया। पिता भी उसको अपनी पुत्री मानने को तैयार नहीं है। मामले को संज्ञान लेते हुए उपजिलाधिकारी ने एक इतिहासिक कदम उठाया। पीड़िता का तत्कालीन निवास प्रमाण पत्र जारी कर, पिता को प्रतिमाह 7000 रूपये गुजारा भत्ता देने के लिए आदेश जारी कर दिया।इसके साथ 2027 तक हर हाल में पुत्री की शादी कराने के निर्देश दिए। दिऐ गए समय पर शादी न कराने पर पिता के चल -अचल संपत्ति का आधा मलिकाना हक उसके पहली,स्वर्गवासी पत्नी की पुत्री

शिवानी का होगा। वही उपजिलाधिकारी ने शिवानी की जबतक शादी नहीं होती, तब तक ननिहाल में मामा के देख रेख में रहने के निर्देश दिए। वही पिता को गुजारा भत्ता की पहली किस्त दो दिन के अंदर देने को कहा। जल्द से जल्द गुजारा भत्ता न देने पर कार्रवाई की जायेगी। उपजिलाधिकारी के इस अदभुत कार्यवाही से क्षेत्र में न्याय प्रणाली पर लोगों का विस्वास अटल हो गया है।विचार करते हुए, यह कहना उचित होगा कि एसडीएम साहब ने न्याय और समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

इस फैसले के महत्वपूर्ण पहलू

बच्ची के अधिकारों की रक्षा किया गया। एसडीएम साहब ने बच्ची के अधिकारों की रक्षा के लिए जो कदम उठाया है, वह सराहनीय है। पिता को अपनी पहली पत्नी की बेटी को गुजारा भत्ता देने का आदेश देना, पिता की जिम्मेदारी को दर्शाता है।बच्ची को संपत्ति में हिस्सा देने का फैसला, उसे अपने अधिकारों का उपयोग करने का अवसर प्रदान करता है।इस फैसले का प्रभाव से

समाज में जागरूकता आयेगी। यह फैसला समाज में जागरूकता पैदा करेगा और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा।न्याय प्रणाली में लोगों का विश्वास बना है।

यह फैसला बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है


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