
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओबरा के एसडीएम और चोपन एसएचओ को अदालत में 25 नवंबर को तलब किया है।
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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उनके द्वारा हाईकोर्ट में दी गई रिपोर्ट में विरोधाभास पाया गया। इस पर कोर्ट ने जताई नाराज़गी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ओबरा और चोपन प्रशासन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उपजिलाधिकारी ओबरा और थानाध्यक्ष चोपन को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाज़िर होने का आदेश दिया है। मामला राजेश कुमार जायसवाल बनाम राज्य सरकार में दायर आवेदन धारा 528 बीएनएसएस से जुड़ा है। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कहा कि सरकारी अधिवक्ता द्वारा दी गई रिपोर्ट और आवेदक द्वारा दाखिल किए गए अनुपूरक हलफनामे के बीच गंभीर विरोधाभास पाया गया है। कोर्ट ने इसे दोषपूर्ण बताते हुए संबंधित अधिकारियों को अगली तारीख पर अदालत में उपस्थिति होने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 25 नवंबर को दोपहर 2 बजे होगी । हाई कोर्ट ने इस आदेश को सी जेएम के मार्फ़त अधिकारियो को तलब कराने का निर्देश दिया है । कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकारी वकील द्वारा पेश कीगई जानकारी और आवेदक के सप्लीमेंट्री हलफनामे में गंभीर असंगति है, जिसे स्पष्ट किए बिना आगे कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसी कारण दोनों अधिकारियों को हाज़िर होने का आदेश जारी हुआ। मामला यह है कि दो पक्षों में पुस्तैनी सम्पत्ति (ज़मीन मकान) को लेकर विवाद है।