
सोनभद्र: रसल वाइपर के डसने से अधेड़ की हालत बिगड़ी, समय पर अस्पताल पहुंचने से शुरू हुआ उपचार
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
सोनभद्र जनपद के दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के बघाडू गांव में गुरुवार सुबह शौच के लिए घर से निकले एक 50 वर्षीय अधेड़ को जहरीले रसल वाइपर (Russell’s Viper) सांप ने डस लिया। सर्पदंश के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों और ग्रामीणों की तत्परता से उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) दुद्धी पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।
घायल की पहचान बघाडू गांव निवासी जगदीश (50) पुत्र रामदेव के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि जगदीश सुबह घर से कुछ दूरी पर शौच के लिए गए थे। इसी दौरान घास में छिपे रसल वाइपर पर उनका पैर पड़ गया। खतरा महसूस होते ही सांप ने उनके पैर में डस लिया। शुरुआत में उन्हें हल्का दर्द महसूस हुआ, लेकिन कुछ ही मिनटों में तेज दर्द, चक्कर, बेचैनी और शरीर में कमजोरी महसूस होने लगी। देखते ही देखते उनकी हालत गंभीर होने लगी।
जगदीश की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन भी वहां पहुंच गए। बिना किसी तरह की झाड़-फूंक या देरी किए ग्रामीणों ने उन्हें निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू कर आवश्यक दवाएं और एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध कराते हुए उनकी निगरानी शुरू कर दी।
चिकित्सकों ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि मरीज को शीघ्र उपचार मिल जाए तो गंभीर जटिलताओं की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है। फिलहाल जगदीश की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक चिकित्सकीय उपचार जारी है।
घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में खेतों, झाड़ियों और घास वाले इलाकों में जहरीले सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में सुबह-शाम खुले स्थानों पर जाते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से गांव के आसपास झाड़ियों की साफ-सफाई कराने तथा लोगों को सर्पदंश से बचाव के प्रति जागरूक करने की मांग की है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार पर भरोसा करने के बजाय मरीज को बिना समय गंवाए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि समय पर मिला चिकित्सकीय उपचार ही मरीज की जान बचाने में सबसे अधिक प्रभावी साबित होता है।