
सोनभद्र: खाद की कालाबाजारी से आक्रोशित किसानों ने डीएम और जिला कृषि अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई की उठाई मांग
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
सोनभद्र जनपद के बभनी विकासखंड क्षेत्र में खाद की कथित कालाबाजारी और निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर बिक्री को लेकर किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। क्षेत्र के किसानों ने जिलाधिकारी एवं जिला कृषि अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी खाद विक्रेताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व प्रधान एवं प्रधान संघ के जिला सचिव संजय कुमार गुप्ता के नेतृत्व में रन्दह गांव सहित आसपास के कई गांवों के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला मुख्यालय पहुंचा और अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। किसानों का आरोप है कि बभनी क्षेत्र के अधिकृत खाद विक्रेता डीएपी और यूरिया जैसी आवश्यक उर्वरकों को सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक दरों पर बेच रहे हैं, जिससे किसानों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा लगभग 1350 रुपये निर्धारित मूल्य वाली डीएपी खाद की एक बोरी 2100 से 2200 रुपये तक में बेची जा रही है। वहीं 266 रुपये मूल्य वाली यूरिया की बोरी 500 से 600 रुपये तक में किसानों को खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि खेती-किसानी पहले से ही महंगी हो चुकी है, ऐसे में खाद की मनमानी कीमतों ने किसानों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
ज्ञापन में किसानों ने आरोप लगाया कि बभनी ब्लॉक के लगभग 10 से 12 अधिकृत खाद विक्रेता खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। किसानों का कहना है कि जिला और ब्लॉक स्तर के संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण ऐसे दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं और वे बेखौफ होकर निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूल रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि सभी खाद दुकानों की आकस्मिक जांच कराई जाए, स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रजिस्टर का सत्यापन किया जाए तथा निर्धारित मूल्य से अधिक दाम वसूलने वाले लाइसेंसधारी विक्रेताओं के लाइसेंस तत्काल निरस्त कर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही खाद की कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाई गई और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र के किसान व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
किसानों ने प्रशासन से मांग की कि किसानों को सरकारी निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि खरीफ सीजन की खेती बिना किसी बाधा के पूरी हो सके और किसानों का आर्थिक शोषण रोका जा सके।