
किसानों के लिए राहत भरी पहल: गाटा अंश निर्धारण अभियान तेज, घोरावल तहसील में 82% कार्य पूर्ण
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 के तहत किसानों की भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए गाटा अंश निर्धारण अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। यह व्यवस्था 11 फरवरी 2016 से प्रभावी की गई थी, जिसके अंतर्गत खतौनी में 14वां स्तंभ जोड़कर अंश निर्धारण की प्रक्रिया को शामिल किया गया।
अंश निर्धारण का अर्थ है कि किसी खाते के एक गाटा में खातेदारों के हिस्से का स्पष्ट क्षेत्रफल तय किया जाए। इससे यह निर्धारित हो जाता है कि किस किसान के पास कितनी भूमि है। यह प्रक्रिया किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है।
अंश निर्धारण होने के बाद किसानों को बैंक से ऋण लेने के लिए तहसील से अलग से हिस्सा प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वहीं बैनामा के समय भी किसान अपने हिस्से की भूमि का ही विक्रय कर सकता है, जिससे भूमि विवाद की संभावना काफी कम हो जाती है। खतौनी में प्रत्येक खातेदार का हिस्सा क्षेत्रफल एवं भिन्न के रूप में स्पष्ट दर्ज किया जाता है।
राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के निर्देश पर यह अभियान व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। तहसील घोरावल में अब तक लगभग 82 प्रतिशत गाटों का अंश निर्धारण कार्य पूर्ण किया जा चुका है।
राजस्व विभाग के अनुसार जिन खातों का अंश निर्धारण नहीं हो पाता, उनमें कई महत्वपूर्ण आदेशों का अनुपालन खतौनी में दर्ज नहीं हो पाता। इससे किसानों के कई आवश्यक कार्य प्रभावित होते हैं।
प्रशासन ने सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्रीय लेखपाल से संपर्क कर अपने खाते एवं गाटे का अंश निर्धारण जल्द से जल्द कराएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी अथवा भूमि संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े।