
ड्रमंडगंज घाटी बनी हादसों का हॉटस्पॉट, खराब सड़क डिजाइन से फिर बड़ा हादसा टला
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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मिर्जापुर: वाराणसी-रीवा फोरलेन पर स्थित ड्रमंडगंज घाटी का जालिम मोड़ एक बार फिर गंभीर सड़क हादसे का गवाह बना। शुक्रवार देर शाम यहां एक ट्रक का अचानक ब्रेक फेल हो गया, जिसके चलते वह आगे चल रहे ट्रेलर से जा भिड़ा। गनीमत रही कि इस भीषण टक्कर में ट्रक चालक खन्ने यादव और खलासी बृजेश यादव बाल-बाल बच गए।
बताया जा रहा है कि ट्रक मध्य प्रदेश के कटनी से अरहर की दाल लेकर बिहार की ओर जा रहा था। हादसे के समय वाहन घाटी के खतरनाक मोड़ से गुजर रहा था, जहां पहले से ही सड़क की स्थिति और डिजाइन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
ड्रमंडगंज घाटी में तीखे मोड़, असंतुलित ढलान और चेतावनी संकेतों की भारी कमी जैसी गंभीर खामियां मौजूद हैं, जो इसे लगातार दुर्घटनाओं का केंद्र बना रही हैं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि इस फोरलेन के निर्माण का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित और सुगम यात्रा था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी इस खंड की खामियां दूर नहीं की गई हैं।
यह मार्ग राष्ट्रीय परिवहन का अहम हिस्सा है, जहां से प्रतिदिन कोलकाता, सिलीगुड़ी, बिहार और नागपुर समेत देशभर के लिए हजारों मालवाहक वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
स्थानीय लोगों की मांग:
ड्रमंडगंज घाटी में सड़क डिजाइन की तत्काल समीक्षा कर सुधार किए जाएं, पर्याप्त संकेतक, स्पीड कंट्रोल उपाय और सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू की जाएं, ताकि भविष्य में बड़े हादसों को रोका जा सके।
सवाल बड़ा है: आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी, और कब सुरक्षित होगा यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मार्ग?