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फसल बीमा पर डीएम सख्त: 10 दिन में मुआवजा दें, लंबित दावों पर जताई नाराजगी

फसल बीमा पर डीएम सख्त: 10 दिन में मुआवजा दें, लंबित दावों पर जताई नाराजगी


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ़ ब्यूरो: कमलेश पाण्डेय |

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सोनभद्र। किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित जनसुनवाई कक्ष में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में डीएम ने बीमा कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिया कि फसल क्षति का मुआवजा अधिकतम 10 कार्य दिवस के भीतर किसानों के खातों में पहुंचाया जाए।

डीएम ने कहा कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक समयबद्ध ढंग से पहुंचना चाहिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए लंबित दावों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

उप कृषि निदेशक ने बैठक में जानकारी दी कि खरीफ वर्ष 2025 में जिले के 19,080 किसानों ने फसल बीमा कराया था। इनमें से 6,425 किसानों को 826.98 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि वितरित की जा चुकी है, जबकि 151 लाख रुपये की राशि आधार आधारित प्रक्रिया के चलते लंबित है।

उन्होंने बताया कि असामयिक वर्षा और ओलावृष्टि के कारण 11,483 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, जिनमें से 8,432 पात्र पाए गए और उन्हें भुगतान किया गया, जबकि 3,051 आवेदन अपात्र घोषित किए गए।

डीएम ने लंबित 4,764 दावों के सर्वे में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय पर सर्वे नहीं किया गया तो सभी लंबित दावों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने किसानों की शिकायत प्रक्रिया की भी समीक्षा की। बताया गया कि किसान फसल नुकसान की स्थिति में 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

बैठक में यह भी सामने आया कि खरीफ 2024 की तुलना में खरीफ 2025 में 5,000 से अधिक किसानों ने अतिरिक्त रूप से बीमा कराया है। डीएम ने अग्रणी जिला प्रबंधक, इंडियन बैंक को निर्देश दिया कि खरीफ 2026 में अधिक से अधिक केसीसी धारक किसानों का बीमा सुनिश्चित कराया जाए और उनका डेटा समय से पोर्टल पर अपलोड किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि डेटा अपलोडिंग में लापरवाही होने पर संबंधित बैंक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही बीमा कंपनी को निर्देश दिया गया कि ग्राम पंचायत स्तर पर किसान पाठशालाएं, पंपलेट वितरण और बाइक रैली के माध्यम से योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान योजना से जुड़ सकें।


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