
खोराडीह में रंगमंच की स्वर्णिम परंपरा—50वीं वर्षगांठ पर तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव सम्पन्न
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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राजगढ़, मिर्जापुर। ग्राम पंचायत खोराडीह एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता के लिए चर्चा में रहा, जहां अभिनय नाट्य संस्था द्वारा भव्य तीन दिवसीय नाट्य मंचन का आयोजन किया गया। खास बात यह रही कि संस्था ने इस वर्ष अपने 50 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी करते हुए स्वर्ण जयंती समारोह भी मनाया, जिसमें संस्था से जुड़े पदाधिकारियों और कलाकारों को सम्मानित किया गया।
इस सांस्कृतिक आयोजन के पहले दिन “मोहब्बत की जंग”, दूसरे दिन “दुल्हन नहीं, दहेज चाहिए” और तीसरे दिन “घर का विद्रोह” जैसे प्रभावशाली नाटकों का मंचन किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों, पारिवारिक मूल्यों और मानवीय रिश्तों को सशक्त रूप से मंच पर उतारा गया, जिसने दर्शकों को भावुक और सोचने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सभी नाटक गांव के ही प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए, जो स्थानीय कला और प्रतिभा को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट उदाहरण है। सामाजिक, पौराणिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित इन प्रस्तुतियों ने गांव में समरसता और सांस्कृतिक चेतना को और मजबूत किया।
ग्राम पंचायत खोराडीह में न केवल नाट्य मंचन, बल्कि समय-समय पर कबड्डी, क्रिकेट, वॉलीबॉल प्रतियोगिताएं, छठ पूजा, डांस प्रतियोगिता, कुश्ती दंगल, डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती एवं भगवान बिरसा मुंडा जयंती जैसे विविध सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। यह सभी आयोजन गांव के लोगों को एक सूत्र में पिरोने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम होते हैं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा और प्रेरणा देने का भी कार्य करते हैं। खोराडीह की यह परंपरा निश्चित रूप से अन्य गांवों के लिए एक मिसाल बनती जा रही है।