
15 साल पुराना छलका पुल ढहा, सिंचाई और पशुओं के पानी का संकट
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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सरकारी धन से बने निर्माण की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, जल्द पुनर्निर्माण की मांग
घोरावल, सोनभद्र। घोरावल विकासखंड के भरकना गांव में पहाड़ी नाले पर करीब 15 वर्ष पहले लाखों रुपये की लागत से बनाया गया छलका पुल ढह गया है। पुल टूटने के कारण बारिश के पानी को रोकने की व्यवस्था समाप्त हो गई है, जिससे किसानों के सामने सिंचाई के साथ ही पशुओं और जंगली जानवरों के लिए पानी की समस्या खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार यह छलका पुल बारिश के पानी को रोककर आसपास के खेतों की सिंचाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। नाले में पानी जमा होने से ग्रामीणों के पशुओं को भी पीने का पानी उपलब्ध हो जाता था। इसके अलावा आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले जंगली जानवर भी इसी जलस्रोत पर निर्भर रहते थे।
देवगढ़, मिझुन, मझिली और हिनौती समेत कई पहाड़ी इलाकों से निकलने वाला बारिश का पानी इसी नाले के रास्ते नदी में पहुंचता है। पुल के टूट जाने के बाद पानी को रोकने की व्यवस्था नहीं रह गई है और बारिश का पानी सीधे नदी में बह जा रहा है। इससे बरसात के बाद खेतों की सिंचाई तथा अन्य जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीण रिंकू, शिववचन, गुड्डू, कल्लू और विमलेश ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए छलका पुल का जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि पुल मजबूत और गुणवत्तापूर्ण तरीके से बनाया जाए, ताकि लंबे समय तक किसानों, पशुपालकों और क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिल सके।
ग्रामीणों ने सरकारी धन से निर्मित पुल के अपेक्षाकृत कम समय में ढह जाने पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने संबंधित विभाग से निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मजबूत पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो आने वाले समय में पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है।