• +91 8127948307
  • info@tejasvisangthan.in
  • uttar Pradesh sonebhadra
News
सोनभद्र में 7 से 9 सीटर निजी वाहनों के फिटनेस पर ब्रेक

सोनभद्र में 7 से 9 सीटर निजी वाहनों के फिटनेस पर ब्रेक


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

फोटो कैप्शन : एआरटीओ कौशल कुमार सिंहचीफ

ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
8382048247

2005 का आदेश खत्म, स्कॉर्पियो-इनोवा से अर्टिगा और सफारी तक के मालिकों को राहत

सोनभद्र। जिले के निजी वाहन मालिकों के लिए परिवहन विभाग ने बड़ी राहत दी है। अब 7 से 9 सीटर निजी वाहनों को केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं बनवाना होगा। स्कॉर्पियो, इनोवा, अर्टिगा, सफारी जैसी पारिवारिक गाड़ियों के मालिकों को हर साल फिटनेस के लिए एआरटीओ कार्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने वर्ष 2005 में जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत 6 से अधिक और 9 सीट तक क्षमता वाले गैर-परिवहन निजी वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया गया था।
परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश की ओर से जारी आदेश के बाद यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि गैर-परिवहन यानी निजी वाहनों पर केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस की बाध्यता लागू करना उचित नहीं है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैर-परिवहन वाहनों के फिटनेस से संबंधित नियम निर्धारित करने का अधिकार केंद्र सरकार के स्तर पर है। इसी कानूनी स्थिति के मद्देनजर 12 दिसंबर 2005 के आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

सोनभद्र में बड़ी संख्या में वाहन मालिक होंगे लाभान्वित

इस फैसले का असर सोनभद्र के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। राबर्ट्सगंज, चोपन, ओबरा, अनपरा, रेणुकूट, दुद्धी, म्योरपुर समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में परिवार के इस्तेमाल में आने वाली 7 से 9 सीटर निजी गाड़ियों के मालिकों को अब केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस की प्रक्रिया पूरी नहीं करनी होगी। इससे उन्हें समय और पैसे दोनों की बचत होगी। अब तक ऐसे वाहन मालिकों को निर्धारित शुल्क जमा करने के साथ फिटनेस प्रक्रिया पूरी करने के लिए एआरटीओ कार्यालय की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कई वाहन मालिकों को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे तो कुछ एजेंटों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी कराते थे। नए आदेश के बाद इस अनिवार्यता से राहत मिलेगी।

निजी वाहन मालिकों की जिम्मेदारी फिर भी रहेगी

फिटनेस प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि वाहन की तकनीकी स्थिति को नजरअंदाज किया जा सकता है। सड़क पर चलने वाले प्रत्येक वाहन का सुरक्षित और अच्छी तकनीकी स्थिति में होना जरूरी है। ब्रेक, टायर, लाइट, स्टीयरिंग समेत वाहन के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की समय-समय पर जांच कराना वाहन मालिक की जिम्मेदारी होगी। खराब अथवा जर्जर वाहन सड़क पर चलाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। परिवहन विभाग के इस फैसले से निजी वाहन मालिकों को जहां विभागीय औपचारिकताओं और अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिलेगी, वहीं उन्हें अपने वाहनों को सुरक्षित स्थिति में रखने के प्रति भी सजग रहना होगा।

बोले एआरटीओ

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कौशल कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यालय से जारी आदेश के तहत 7 से 9 सीट वाले निजी गैर-परिवहन वाहनों को फिटनेस से मुक्त कर दिया गया है। पहले इन वाहनों का प्रत्येक वर्ष फिटनेस कराना अनिवार्य था, लेकिन अब केवल सीट क्षमता के आधार पर इन वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण-पत्र बनवाना जरूरी नहीं होगा। यह व्यवस्था मुख्यालय के आदेश के अनुसार लागू की गई है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Notifications OK .