
विंध्याचल के जंगलों में आरे का राज, कागजों में हरियाली का काज
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
8382048247
मीरजापुर / गैपुरा
*थाना विंध्याचल की चौकी गैपुरा, विजयपुर अंतर्गत खुशियरा के जंगल इन दिनों चर्चा में हैं। चर्चा पौधारोपण की नहीं, पौधा-निपटान की है।*
शासन-प्रशासन एक तरफ “एक पेड़ माँ के नाम” लगवा रहा है, सेल्फी खिंचवा रहा है, पर्यावरण दिवस मना रहा है। वहीं दूसरी तरफ गैपुरा के जंगलों में हरे-भरे पेड़ों की बेरहमी से कटान जारी है। *सूत्र बताते हैं कि यह कटान बिना वन विभाग की मेहरबानी के संभव ही नहीं है।*
*आरोप है कि लालगंज वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। दिन में वही कर्मचारी अतिक्रमण हटाने और पौधे लगाने का ज्ञान देते हैं और रात होते ही जंगल में आरे गूँजने लगते हैं। जंगल चीखता है, पर आवाज रेंज ऑफिस तक पहुँचते-पहुँचते फुसफुसाहट बन जाती है।*
*कहने को तो लालगंज में कई वन क्षेत्र हैं, लेकिन हालात लगभग एक जैसे हैं। जहाँ देखो वहीं अवैध कटान का शोर है। सरकार पेड़ लगाने के लिए बजट दे रही है और नीचे तस्कर उसी बजट वाले पेड़ों को काटकर अपना बजट बना रहे हैं।*
*इसे ही कहते हैं पर्यावरण संरक्षण का दोहरा मॉडल – ऊपर से हरियाली का प्रचार और नीचे से हरियाली का संहार।*
*अब देखना यह है कि वन विभाग के आला अधिकारी इस अवैध कटान पर आरा चलाते हैं या फाइलों में हरियाली दिखाकर इतिश्री कर लेते हैं।*