
मिर्जापुर: गंगा का जलस्तर घटा, घाटों पर छोड़ गया गंदगी का अंबार
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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पक्का घाट और नारघाट पर जमा बालू-कचरे से बिगड़ी सूरत, स्वच्छता के दावों पर उठे सवाल
मिर्जापुर। गंगा नदी में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब घाटों पर गंदगी और बालू का अंबार दिखाई देने लगा है। बाढ़ के दौरान पानी के साथ बहकर आई बालू और कूड़ा-कचरा पक्का घाट, नारघाट समेत शहर के अन्य घाटों पर जमा हो गया है। इससे घाटों की सुंदरता प्रभावित होने के साथ ही श्रद्धालुओं और आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ का पानी घटने के बाद घाटों की सीढ़ियों और किनारों पर जगह-जगह बालू की मोटी परत जम गई है। इसके साथ ही बहकर आया कूड़ा-कचरा भी घाटों पर फैला हुआ है। गंदगी के कारण घाटों की सूरत बिगड़ गई है और लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। गंगा स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए घाटों पर पहुंचने वाले लोगों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है।
घाटों की सफाई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने के लिए लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद नदी में कचरा फेंके जाने की समस्या चिंता का विषय बनी हुई है। बाढ़ के बाद घाटों पर जमा गंदगी ने स्वच्छता व्यवस्था और नियमित सफाई के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घाटों पर फैली बालू और कूड़े-कचरे की समय से सफाई नहीं होने पर स्थिति और खराब होने की आशंका है।
स्थानीय स्तर पर घाटों की साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है, ताकि धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन स्थलों की गरिमा बनी रहे। ऐसे में संबंधित विभाग को चाहिए कि पक्का घाट, नारघाट सहित अन्य प्रभावित घाटों पर विशेष सफाई अभियान चलाकर बालू और कचरे को हटाया जाए। साथ ही गंगा में कचरा फेंकने वालों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, जिससे गंगा की स्वच्छता और घाटों की सुंदरता बरकरार रह सके।