
वंदे मातरम के जयघोष से गूंजा वैष्णवी कान्वेंट स्कूल, नन्हे जांबाजों ने शस्त्र सलामी देकर पुलवामा के शहीदों को किया याद
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
के के पाठक कमलेश पाण्डेय
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मिर्जापुर जमालपुर, 14 फरवरी:
पुलवामा आतंकी हमले में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की पुण्यतिथि पर आज वैष्णवी कान्वेंट स्कूल में शौर्य और संवेदना का अद्भुत संगम देखने को मिला। विद्यालय परिसर में आयोजित विशेष ‘श्रद्धांजलि सभा’ के दौरान आर्मी ड्रिल से प्रशिक्षित छात्र-छात्राओं ने पूरी सैन्य परंपरा के साथ अमर शहीदों को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया और शस्त्र सलामी देकर उनके शौर्य को नमन किया।
अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का बेजोड़ संगम,
कार्यक्रम का शुभारंभ शहीदों के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। विद्यालय के आर्मी ड्रिल ट्रेन्ड बच्चों— अनामिका, रिया, आफरीन, आकांक्षा, दीपांजलि, साबिर, सागर और खुशी— ने जब हाथ में शस्त्र लेकर कदमताल करते हुए सलामी दी, तो वहां उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो उठा। इसके पश्चात दो मिनट का मौन रखकर वीर आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई। पूरा वातावरण ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गुंजायमान रहा।
मैनेजर का संबोधन: वीरों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक श्री रामराज सिंह ने पुष्पगुच्छ अर्पित कर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “आज का दिन हमारे उन वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है, जिन्होंने तिरंगे की आन-बान और शान के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। हमारे विद्यालय के बच्चों में यह सैन्य प्रशिक्षण न केवल अनुशासन पैदा करता है, बल्कि उनमें देश सेवा का जज्बा भी भरता है।”
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्य रूप से रमेश, मदन, मुस्कान, नीरज, जयराज, कंचन, विनीता और रेनू सहित विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शहीदों की वीरता को याद किया और समाज में राष्ट्रवाद की अलख जगाने का संकल्प लिया।
यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने का तरीका है जिन्होंने अपने लाल खोए हैं। वैष्णवी कान्वेंट स्कूल की यह पहल दर्शाती है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को देश के इतिहास और उसके रक्षकों के प्रति जागरूक करना भी शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा है।