
5 रूटों पर चल रहे 8 हजार ई- रिक्शा, दूरी 2 हो या 5 किमी किराया देना पड़ता है 20-25 रुपये
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
8382048247
वासलीगंज से शास्त्री पुल 3.5 किमी 20
कचहरी से मिर्जापुर स्टेशन 3.5 किमी 20
कचहरी से शास्त्री पुल 5 किमी 25
शास्त्री पुल से विंध्याचल 3 किमी 10
शास्त्री पुल से मुकेरी बाजार 4 किमी 20
सिविल लाइन से मेडिकल कॉलेज 4 किमी 15
मुकेरी बाजार से रेलवे स्टेशन 3 किमी 15
मिर्जापुर। शहर के प्रमुख पांच रूटों पर 8 हजार ई- रिक्शा और ऑटो चलते हैं। दूरी चाहे तीन किलोमीटर हो या चार न्यूनतम किराया 20 रुपये यात्रियों को देना ही पड़ता है। एक दिन में रोजमर्रा के कामकाज से 25 हजार लोग शहर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवागमन करते हैं। मनमाना किराये के लिए आए दिन ई-रिक्शा, ऑटो चालकों और यात्रियों के बीच विवाद होता रहता है। यह विवाद इसलिए है कि जिला प्रशासन की ओर से गठित कमेटी ने अभी तक किराये का निर्धारण नहीं किया है।
शहर के प्रमुख रूटों में कचहरी से शास्त्री सेतु, शास्त्री सेतु से विंध्याचल, कचहरी से रेलवे स्टेशन तक का रूट सबसे अधिक व्यस्त है। इस रूट पर सबसे अधिक ई-रिक्शा और ऑटो का संचालन होता है। शास्त्री सेतु से मुकेरी बाजार होते हुए रेलवे स्टेशन व कचहरी से मेडिकल कॉलेज, कांशीराम आवास विसुंदरपुर तक भी ई-रिक्शा और ऑटो का संचालन होता है। कचहरी से शास्त्री सेतु व कचहरी से स्टेशन रोड पर आए दिन यात्रियों से किराये के लिए विवाद होता है। समस्या यह है कि कचहरी से शास्त्री सेतु तक का किराया ई-रिक्शा और ऑटो चालक 20 रुपये लेते हैं। बीच में यदि कोई यात्री वासलीगंज अथवा त्रिमोहानी पर उतरता है या चढ़ता है और शास्त्री सेतु तक जाता है तो उससे भी वही किराया लिया जाता है। जबकि दूरी लगभग आधी है। इसी तरह कचहरी से रेलवे स्टेशन तक का किराया 20 रुपये लिया जाता है। उतना ही किराया तहसील तिराहे या पुलिस लाइन से भी ई-रिक्शा और ऑटो चालक लेते हैं।हर रूट का निर्धारण होगा किराया, स्टैंड पर चस्पा होगी सूची
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन किराये का निर्धारण करे। जहां से रूट शुुरू होता है जहां समाप्त होता है वहां पर किराये की सूची चस्पा की जाए। इससे यात्रियोंं को जानकारी मिलेगी। सूची में बीच में पड़ने वाले सभी स्थान तक के किराये भी निर्धारित किए जाएं। सिटी मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने कहा कि किराये का निर्धारण होना आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों की समिति बनाकर किराये का निर्धारण कराया जाएगा।
नवरात्र में होती है सबसे अधिक समस्या
किराया निर्धारण नहीं होने से सबसे अधिक समस्या बाहर से आए यात्रियों को नवरात्र मेले के दौरान झेलना पड़ता है। बाहर से आए लोगों को स्थानीय दूरी का पता नहीं चलता इसका फायदा उठाकर ई-रिक्शा चालक मनमाना किराया वसूलते हैं। प्रशासन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करता है।
किराये की समस्या तो है। यदि किराये का निर्धारण हो जाता है तो यात्रियों को सुविधा होगी। ऑटो चालक भी निश्चिंत रहेंगे।
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि एक ही स्थान से चले दो अलग-अलग यात्रियों से अलग-अलग किराया लिया जाता है। इससे यात्रियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है।
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यह सामान्य बात है कि मुख्य रूट पर यदि बीच से यात्री बैठता है तो उससे कम किराया लिया जाना चाहिए लेकिन होता है इसके विपरीत।
इस समस्या का शीघ्र समाधान होना चाहिए। आए दिन के विवाद से छुटकारा मिल जाएगा। लोगों का असंतोष भी दूर होगा।