
आदेश की अवहेलना: तबादले के बाद भी जमे कर्मचारी, किसानों में भारी आक्रोश
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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सोनभद्र, उत्तर प्रदेश: उप कृषि निदेशक कार्यालय द्वारा जारी एक तबादला आदेश के बावजूद, तीन प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी कर्मचारियों ने अभी तक अपने नए कार्यस्थल पर पदभार ग्रहण नहीं किया है। इन कर्मचारियों का स्थानांतरण जनता से मिली शिकायतों और उनके खिलाफ चल रही जांच के बाद किया गया था, लेकिन वे खुलेआम उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। इस स्थिति ने किसानों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है और सरकारी योजनाओं की छवि को धूमिल कर रहा है।
भाजपा किसान मोर्चा के जिला मीडिया प्रभारी, ई. प्रकाश पाण्डेय ने बताया कि कृषि विभाग के ये कर्मचारी सरकारी योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने के बजाय पैसा कमाने का जरिया बना लिए हैं। उन्होंने कहा, “जनपद के किसान खाद के लिए परेशान हैं, लेकिन इन कर्मचारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। इससे सरकार की छवि नकारात्मक हो रही है और किसानों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।”
खाद वितरण में मनमानी और धांधली के आरोप
श्री पाण्डेय के अनुसार, घोरावल विधानसभा की तिलौली और इमलीपुर जैसी लगभग सभी सोसाइटियों की हालत बहुत खराब है। किसानों को खाद की एक बोरी के लिए भी दिनभर धूप में लाइन लगानी पड़ती है और कई बार तो दिन बर्बाद करने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। बड़े किसानों और छोटे किसानों को 1, 1 बोरी उपलब्ध कराने से भी बड़े किसानों में है आक्रोश किसानों का कहना है कि खेती के लिए पर्याप्त खाद वितरित नहीं मिल रही और कुछ लोगों ने इसको ब्लैक करने का रास्ता बना लिया है। जिसके पास बिस्वा में जमीन है प्रतिदिन लाइन लगा कर खाद लेकर ब्लैक कर रहा है और बड़े किसान परेशान व मजबूर है ब्लैक में खरीदी के लिए।
तबादला किए गए कर्मचारियों में से एक, करमा ब्लॉक के गोदाम इंचार्ज रामेश्वर सिंह, के खिलाफ जनता ने पहले से ही मनमानी की शिकायतें की थीं। स्थानांतरण के आदेश के बावजूद, उन्होंने अभी तक अपने पद से मुक्ति नहीं ली है। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा प्रदर्शनी के लिए दिए गए बीजों को किसानों में वितरित करने के बजाय, वे मनमाने ढंग से मनचाहे लोगों को पैसे लेकर बेच रहे हैं। इस संबंध में कृषि सहायक सुरेंद्र जी को टेलीफोन पर कई बार जानकारी दी गई है और उच्च अधिकारियों को भी इस मामले से अवगत कराया गया है।
सख्त कार्रवाई की मांग
इस गंभीर स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये कर्मचारी अपने ‘मलाईदार’ पदों को छोड़ना नहीं चाहते। उनकी मनमानी न केवल सरकारी कामकाज को प्रभावित कर रही है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि कुछ कर्मचारी जनता के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। अब जनता और किसान संगठनों की ओर से इन लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई और गहन जांच की मांग उठ रही है। ताकि सरकारी आदेशों का पालन सुनिश्चित हो सके और किसानों की समस्याओं का समाधान हो।