
मातृत्व बना मौत का फंदा! जच्चा–बच्चा की दर्दनाक मौत से उबला सोनभद्र, फरार डॉक्टर दंपती पर पुलिस का इनामी शिकंजा
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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सोनभद्र। जनपद के दुद्धी क्षेत्र में निजी अस्पताल की लापरवाही से जच्चा–बच्चा की मौत का मामला अब पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। दर्दनाक घटना के बाद से फरार चल रहे चिकित्सक दंपती पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए इनाम घोषित कर दिया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस अधीक्षक सोनभद्र के निर्देश पर दुद्धी स्थित निजी अस्पताल संचालक व चिकित्सक डॉ. धर्मेंद्र पाल और उनकी पत्नी डॉ. सीमा पाल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। दोनों आरोपियों पर ₹10,000–₹10,000 (दस-दस हजार रुपये) का इनाम घोषित किया गया है। दोनों चिकित्सक घटना के बाद से लगातार फरार हैं और पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते वर्ष 28 अक्टूबर को सोनादेवी को प्रसव पीड़ा के चलते दुद्धी स्थित उक्त निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद अचानक हालत बिगड़ने से जच्चा और नवजात दोनों की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा व प्रदर्शन किया। हालात बिगड़ने पर मौके पर पहुंची पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को तत्काल सीज कर दिया। तब से यह अस्पताल बंद पड़ा है।
घटना के बाद से ही डॉक्टर दंपती मौके से फरार हो गए। पुलिस द्वारा कई बार दबिश देने के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। इसी मामले से जुड़े एक अन्य फरार अभियुक्त विजेंद्र ओझा, निवासी खुर्जा गांव, थाना पन्नुगंज, पर भी पुलिस ने ₹5,000 (पांच हजार रुपये) का इनाम घोषित किया है।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि आरोपी शीघ्र आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध और भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को फरार आरोपियों के संबंध में कोई भी जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
यह मामला अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाह इलाज के खिलाफ कानून की सख्त चेतावनी बन चुका है।