
एनसीएल बीना परियोजना में मूल भू-विस्थापित मजदूरों के साथ अन्याय
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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*रोजगार न मिलने पर 19 जनवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल व आमरण अनशन की चेतावनी*
बीना / सोनभद्र । एनसीएल बीना परियोजना में ओबी (ओवर बर्डन) का कार्य कर रही कंपनी राधा चेन्नई इंजीनियरिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड पर मूल भू-विस्थापित मजदूरों को रोजगार से वंचित रखने का गंभीर आरोप लगा है। इसको लेकर प्रभावित मजदूरों में भारी आक्रोश व्याप्त है। रोजगार न मिलने से क्षुब्ध एक मूल भू-विस्थापित मजदूर ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, सत्याग्रह एवं आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
ग्राम घरसडी, पोस्ट योगीचौरा, तहसील दुद्धी, जिला सोनभद्र निवासी बबूल प्रसाद दुबे पुत्र श्याम कार्तिक दुबे ने बताया कि उनके बाबा स्व. नवाब सम दुबे पुत्र स्व. विश्वंभर के नाम दर्ज लगभग 2.94 एकड़ भूमि एवं भवन को एनसीएल बीना परियोजना द्वारा विभिन्न अधिसूचनाओं के माध्यम से अधिग्रहित किया गया था। बावजूद इसके, अब तक पूर्व समझौते के अनुसार कृषक भूमि एवं आवासीय प्लाट उपलब्ध नहीं कराया गया है।
पीड़ित ने बताया कि वह विगत 15 वर्षों से एनसीएल की पूर्व ओबी कंपनियों में कार्य कर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करता रहा, लेकिन वर्तमान में कार्यरत कंपनी द्वारा मूल भू-विस्थापित होते हुए भी उसे रोजगार से वंचित कर दिया गया है। इस संबंध में उन्होंने कई बार एनसीएल बीना प्रबंधन एवं उप जिलाधिकारी दुद्धी को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया। उप जिलाधिकारी द्वारा बायोडाटा पर हस्ताक्षर कर रोजगार दिलाने का आश्वासन भी दिया गया, किंतु अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित ने बताया कि 18 फरवरी 2022 की श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की अधिसूचना तथा 10 जुलाई 2006 को एनसीएल मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि 80 प्रतिशत मूल भू-विस्थापितों को रोजगार में रखा जाना अनिवार्य है, लेकिन कंपनी द्वारा इन नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए बाहरी लोगों से कथित रूप से धन लेकर उन्हें कार्य पर रखा जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है।
पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उसे रोजगार नहीं दिया गया, तो वह दिनांक 19 जनवरी 2026 से एनसीएल बीना परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, सत्याग्रह एवं आमरण अनशन प्रारंभ करेगा। इसकी पूर्ण जिम्मेदारी एनसीएल प्रबंधन एवं भारत सरकार की होगी।
यह मामला न केवल रोजगार बल्कि मूल भू-विस्थापितों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।