
रूटीन जांच में 30 प्रतिशत लोगों में अधिक बीपी की शिकायत, इसमें 15 प्रतिशत युवा
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
8382048247
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में रोज फिजीशियन की ओपीडी में आ रहे 250 मरीजों में से 45 मरीज बीपी के मिल रहे हैं। इसमें 15 ऐसे हैं जिन्हें पहले से कोई समस्या नहीं थी। वे कमजोरी, सर्दी, खांसी-जुकाम से पीड़ित होकर आए थे। डाॅक्टर ने जांच कराई तो उनका बीपी बढ़ा मिला। इसमें 35 से 60 वर्ष के लोग शामिल है। ऐसे 30 प्रतिशत मरीजों में 15 प्रतिशत युवा हैं। डाॅक्टर के मुताबिक कई अन्य बीमारियों के चलते भी ऐसा हो सकता है पर 35 साल से अधिक उम्र है तो बीपी की जांच जरूर कराएं। इससे वह अन्य बीमारियों की चपेट में आने से बच सकते हैं। मेडिकल काॅलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. राजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि ठंड में ओपीडी में रोज 250 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इसमें सांस के 50, बीपी के 45, हार्ट के 30 व स्ट्रोक से संबंधित पांच से सात मरीज आ रहे हैं। बीपी के जो मरीज मिल रहे हैं, उसमें नई बात ये आ रही है कि ये पहले से बीपी के मरीज नहीं है। वे सर्दी, खांसी-जुकाम व खांसी, सांस फूलना आदि का इलाज कराने आ रहे हैं। इनकी जांच करने पर बीपी बढ़ा मिल रहा है। बीपी आदि की समस्या अनियमित दिनचर्या, खान-पान में बदलाव, फास्टफूड, तेल-घी आदि के अधिक सेवन होती है। वहीं ठंड में धमनियों का सिकुड़ना और अन्य बीमारी भी कारण हो सकती है। डॉक्टर ने सलाह दी कि 35 वर्ष से अधिक उम्र है तो बीपी की जांच जरूर कराएं। अन्य बीमारी थायराइड, ट्यूमर आदि के चलते बीपी की समस्या हो तो उस बीमारी का इलाज करने पर बीपी की समस्या दूर हो जाएगी। इसके अलावा अगर बीपी की समस्या आ रही है तो डाॅक्टर को दिखाकर दवा का सेवन जरूर करें।बीपी और शुगर का 10 वर्ष बाद दिखता असर-मिर्जापुर। असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि बीपी या शुगर की बीमारी होने पर लोग जीवन भर दवा खाने के चलते उसे अनदेखा कर देते है। शुरुआत में तो इसका पता नहीं चलता पर बीपी और शुगर को अनदेखा करने पर 10 वर्ष बाद इसका असर दिखने लगता है। आंख की रोशनी, लकवा, हार्ट की समस्या, गुर्दा खराब होने आदि की समस्या होने लगती है।