
राजगढ़ विकासखंड में घाघर नहर का पानी निचले इलाकों में भर जाने से धान की फसल बर्बाद हो रही है।
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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नहर बंद होने के बावजूद, तटवर्ती किसानों द्वारा खेतों का पानी पंपिंग सेट से नहर में छोड़े जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। पानी भरने के कारण निचले इलाकों में धान की कटाई नहीं हो पा रही है। इसके अतिरिक्त, जो फसल काट ली गई है, वह भी पानी में डूबी होने के कारण सड़ रही है, जिससे उसकी छनाई संभव नहीं हो पा रही है। राजगढ़ विकासखंड के अटारी, मटिहानी, कुंदरूप, रामपुर 33, देवपुरा, डढिंया और ममरी सहित कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। नहर के किनारे वाले खेतों में भी पानी रिसने से कटाई बाधित है। किसान शिवसागर सिंह, आनंद प्रकाश सिंह, वकील अहमद, अलगू चौहान, राजगृह सिंह और धृतराज सिंह जैसे स्थानीय किसानों ने बताया कि लगातार पानी भरे रहने से वे धान की कटाई और सुखाने का काम नहीं कर पा रहे हैं। उनकी कटी हुई फसल भी पानी में सड़ रही है। इस संबंध में मिर्जापुर कैनाल डिविजन (एमसीडी) केनहर 28 अक्टूबर को ही बंद कर दी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नहर के तटवर्ती क्षेत्रों के किसान अपने खेतों से पानी निकालने के लिए पंपिंग सेट का उपयोग कर रहे हैं और यह पानी नहर में छोड़ रहे हैं, जिससे निचले इलाकों के किसानों को परेशानी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि घाघर नहर और बेलन बकहर पोषक दोनों नहरें वर्तमान में बंद हैं।