
भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष यादवेंद्र दत्त द्विवेदी ने जनपद में अवैध खनन और परिवहन और जनपद के ट्रक संचालकों और युवाओं के हित में मुख्यमंत्री को लिखा मार्मिक पत्र
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी महाराज माननीय मुख्यमंत्री महोदय उत्तर प्रदेश सरकार विषयः- जनपद सोनभद्र अपनी दुर्दसा का दंश झेलते हुए अपने हृदय में घोर पीडा का भाव लिए पूज्य महाराज जी से अपने उद्धार की विनती करता है। परम पूज्यनीय महाराज जी, सादर अवगत हो कि प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण, कर्णव ऋिषी की तपोस्थली, नाथ सम्प्रदाय के महान तपस्वी बाबा मछेन्द्र नाथ की तपो भूमि आध्यात्मिक रूप से भी सम्पूर्ण है। प्रागैतिहासिक काल के भित्त चित्रों से सजी, फासिल्स पार्क के साथ मानव जीवन के उत्पत्ति का प्रमाण लिए जनपद सोनभद्र उत्तर प्रदेश का अन्तिम जनपद है, जो अति पिछडा आदिवासी बाहुल्य है, यहां कई राज्यों की सीमाए जुडती हैं जिससे यहां तमाम भाषाओं और संस्कृतियों का संगम भी है, इसके साथ ही प्रदेश के सर्वाधिक राजस्व देने वाले जनपदों मे भी प्रमुख है, खनन से लेते हुए तमाम बडे उद्योगों का केन्द्र भी है। जो सोनभद्र को अत्यन्त समृद्धिशाली और महान भी बनाते हैं। किन्तु आज यह जनपद तमाम उपेक्षाओं और प्रशासनिक निरंकुसता, स्वार्थ, लूट, भ्रष्टाचार और लोकहित नेतृत्व के अभाव में दुर्दसा का दंश झेलते हुए अपने हृदय में घोर पीडा का भाव लिए पूज्य महाराज जी से अपने उद्धार की विनती करता है। परम पूज्यनीय महाराज जी, 15 नवम्बर को भगवान बिरसा मुण्डा जनजातिय गौरव दिवस पर चोपन सोनभद्र में आपके आगमन से जनजाति समाज काफी प्रफुल्लित है, उसको यह आस जगी कि सायद उनके दिन अब बहुरनें वाले हैं, किन्तु इश्वर को सम्भवतः विश्वास नही था कि आपकी कृपा दृश्टि जनपद की दुर्दशा पर पडनी शायद शेष है, दुर्योग ही कहे कि आपके आगमन के दिन खनन हादसा/गरीब आदिवासियों की हत्या से आपकी पूर्ण दृष्टि जनपद की दुर्दशा पर अवश्य पड जाएगी। जनपद में खनन से जुडे लोगों को श्रीमान जी के नजदीक लोगों के रूप में जोडा जाता है, आप एक महान जन नायक है अत एव यह बात मिथ्या है और विपक्षियों कि बदनाम करनें कि भ्रामक बातें भी, किन्तु इस भ्रामक मिथ्या लांछन से निकलने के लिए उचित कर्तव्य / माया रहित कठोर कार्यवाही भी आपको ही करनी होगी।जनपद खनिज सम्पदा से परिपूर्ण है यहां अवैध खनन व परिवहन की तमाम शिकायतें है। किन्तु सच यह है कि खनन व परिवहन जनपद के लोगों के लिए अभिषाप बन गया है, यहा के युवा बेरोजगारी की विवशता में धन धर्म दोनो से जा रहे हैं। अवैध खनन तो बडे लोगों का मसला है उसमें आम जन की कोई पहुँच नही किन्तु सडकों पर परिवहन के रूप में जो खेल चल रहा है उसे सभी देख रहे है और बेरोजगार युवा उस खेल में अपना भविष्य तलासनें के चक्कर में परिवार सहित तबाह हो रहा है। वास्तव में कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा अवैध परिवहन किया जाता जैसे 1000 गाडियों ऐसे लोगों की जो बिना परमिट, ओवर लोड चलती हैं, जिसके सहः में अधिकारियों की भी 2000 और भारी वाहन / ट्रक चलती है जो बाजार / मण्डियों में सस्ते दाम पर अपना माल/गिट्टी बालू बेंच देते हैं, बाजार/मण्डियों में प्रतिस्पर्धी बनें रहनें के लिए बाकी वाहन स्वमी भी परमिट की चोरी करते हैं, क्यो कि उनको सरकारी रायल्टी से दस गुनें अधिक दाम पर वो परमिट खरीदना होता है। और ओवर लोड माल परिवहन करते हैं, तब प्रभावशालीयों व उच्च अधिकारियों के दबाव में स्थानीय प्रशासन सख्ती बरतता है क्यों कि माल सिर्फ प्रभावशालियों का बिकना चाहिए, और ट्रकों की धर पकड सुरू होती है और वो साधारण वाहन स्वामी पकडे जाते है और कर्ज मे लिए ट्रक को छुडानें के लिए लाखों पेनाल्टी भरते हैं, तब वो एक उपाय और करते है कि वो सडकों पर अधिकारियों कि रेकी करते है कि अधिकारी जब सडक से जायेगा तब वो चुपके से अपनी गाडी पार करा लेंगे इसमें उनकी सहायता धन की लालच में उन अधिकारियों से जुडे लोग उनके चालक आदि ही करते हैं, कानूनन तो यह किसी अपराध की श्रेणी में नही आता किन्तु उक्त 3000 वाहनों के प्रभावशाली स्वामियों की आय का मामला होता है इस लिए उन साधरण लोगों पर तथाकथित पासर एक्ट के तहत आतंकवाद और देश द्रोह से भी बडा मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है और बडी आतंकी घटना के माफिक तत्काल उनको पकड कर जेल भेज दिया जाता है जहा 6 महीने से पहले उनकी जमानत ही नही होती, जबकि उक्त 3000 ट्रक धडल्ले से अवैध चलते रहते है। यदि रायल्टी परमिट को आनलाइन सुलभता युक्त कर दिया जाय तो उसके दस गुनें कीमत पर बिकी से रोक लगेगी जिससे परमिट की चोरी बन्द हो जाएगी और ज्यादा खरीदे जानें के कारण सरकार का राजस्व भी बढेगा, तथा या तो गोल्डेन कार्ड की तरह सभी को ओवर लोड चलने की छूट मिले या सभी का ओवर लोड बन्द हो जिससे बाजार में स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा बने और गिट्टी बालू भी सस्ता हो जाए, इसके लिए यह विकल्प है कि उप्सा के लोढी टोल से ही सभी गाडियां गुजरती है दूसरा कोई मार्ग नही उप्सा हर गाडी पर वजन के हिसाब से टोल वसूलता है चाहे ओवर लोड हो या अण्डर लोड, तो प्रत्येक गाडी का रिकार्ड उप्सा के टोल पर है और वहीं उसका वनज का हिसाब किताब कर लिया जाए तो हर कोई अण्डरलोड चलनें को बाध्य होगा और बाजार पर किसी का कब्जा नही होगा। जबकि रात दिन उसी टोल के 100 मीटर आगे खनन विभाग व पुलिस विभाग 100-500 रू० गाडियों से अवैध वसूलनें के लिए डण्डा पीटते रहते है। यह सब आम जनता देखती है और हमारी सरकार की छवि खराब होती है। यदि लखनउ श्रीमान जी के कार्यालय में मिलनें का समय मिल जाए तो प्रार्थी समक्ष होकर विधिवत पूरी स्थिति और सुस्पष्ट करने को तत्पर है। सदर यादवेन्द्र दत्त द्विवेदी ‘एड.’