
_सोनभद्र में राज्य महिला आयोग की सदस्य ने की जनसुनवाई, महिला उत्पीड़न से संबंधित आए पांच मामले_
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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मैडम, मुझे मेरे पति ने घर से निकाल दिया है। पिता के घर रहकर गुजर बस कर रही हूं। ससुराल के लोग ससुराल में नहीं रहने दे रहे और हक से भी वंचित कर रहे हैं। यह व्यथा टेढ़ा गांव की मैमुन पुत्री हिदायत ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य नीलम प्रभात से सुनाई। महिला ने बताया कि उसकी शादी वर्ष 2002 में कोन निवासी मनिरुद्ध के साथ हुआ था। शादी करके एक साल छोड़ दिया गया दिया गया था। पंचायत होने पर पति उसे दोबारा अपने घर ले गया। वर्ष 2004 में वह गर्भवती हुई थी। उस समय उसे दवा खिलाकर बच्चा नष्ट करा दिया गया। इसके बाद उसे छोड़ दिया गया और पति ने दूसरी शादी कर ली। वह अपने मायके मे ही रह रही है। आरोप है कि ससुराल वाले घर में नहीं रहने देते और हक से भी वंचित कर रहे हैं। महिला ने न्याय की गुहार लगाई। राज्य महिला आयोग की सदस्य नीलम प्रभात ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। जनसुनवाई के दौरान उनके समक्ष कुल पांच मामले आए। जिसमें तीन भूमि विवाद से जुड़ा महिला उत्पीड़न का रहा और दो घरेलू हिंसा का मामला रहा। महिला आयोग की सदस्य ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर मामले को निस्तारण करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्थानीय प्रशासन की तरफ से सही से प्रचार-प्रसार नहीं कराए जाने तथा तहसील स्तर के अधिकारियों के नदारद रहने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता जनसुनवाई का है। महिलाओं का हो रहे उत्पीड़न के मद्देनजर सरकार की तरफ से यह योजना चलाई जा रही है। इससे गांव-गांव में महिलाएं जागरूक होंगी। जनसुनवाई के बाद उन्होंने कंपोजिट विद्यालय दुद्धी का निरीक्षण किया।