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_महिलाओं के साथ किया अपराध तो कड़ी सजा के लिए रहें तैयार_

_महिलाओं के साथ किया अपराध तो कड़ी सजा के लिए रहें तैयार_


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय

8382048247

सोनभद्र। महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध को रोकने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए संचालित विशेष अदालतें कारगर साबित हो रही हैं। इन अदालतों में त्वरित सुनवाई के चलते बचाव के लिए गढ़ी गई दलीलों का लाभ दोषियों को नहीं मिल पा रहा है।

 

महज अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्लू (क्राइम अगेंस्ट वोमेन) की अदालत में ही महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों में हर माह चार से पांच दोषियों को सजा सुनाई जा रही है। इसमें कई ऐसे मामले हैं, जिनमें दोषियों को सजा दिलाने के लिए सिर्फ पीड़ित पक्ष ही नहीं अभियोजन को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ ऐसे भी फैसले आए, जो दूसरे मामलों में नजीर बन गए।केस एक::

एक तरफ पढ़ाई तो दूसरी तरफ शादी का नहीं चला पैंतरा

घोरावल थाना क्षेत्र के शिल्पी गांव निवासी राकेश के खिलाफ मिर्जापुर के डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा ने घोरावल थाने में शादी का झांसा देकर मांग में सिंदूर भरने, तीन साल तक संबंध बनाए रखने, गर्भ ठहरने पर दवा खिला देने का केस दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि दोषी ने जहां शारीरिक संबंध बनाने के लिए मिर्जापुर के बथुआ स्थित मंदिर में जाकर पीड़िता की मांग भरी। वहीं, किराए के मकान में साथ रहने के लिए मकान मालिक से पीड़िता का परिचय बहन के रूप में दिया था। शादी के लिए दबाव देने की बात झूठी होने की दलील पर अदालत ने पाया कि एक तरफ पढ़ाई में ध्यान होने की दलील तो दूसरी तरफ दूसरे से शादी की तैयारियां चल रही थी। सात अप्रैल 2025 को 10 वर्ष के कठोर कैद और 50 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

 

केस दो::

अदालत में पहुंचे बच्चे ने निकाल दी झूठी दलीलों की हवा

फरवरी 2019 में राबटर्सगंज कोतवाली में एक महिला ने पोती को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और गर्भ ठहरने पर इंकार करने का केस दर्ज कराया था। आरोप था कि पुसौली निवासी शोभनाथ ने पहले जबरिया संबंध बनाया। इसके बाद शादी का झांसा देकर संबंध बनाए। गर्भ ठहरा तो मना कर दिया। पीड़ित परिवार को केस दर्ज कराने के लिए सरकारी अस्पताल-थाने के चार माह तक चक्कर लगाने पड़े। सुनवाई में बचाव पक्ष ने पुरानी रंजिश की दलील दी लेकिन संबंधों से जन्मे बच्चे ने अदालत पहुंचकर पोल खोल दी। दोषी की तरफ से डीएनए की पहल न आने पर न्यायालय ने माना कि अपराध हुआ है। 10 वर्ष की कठोर कैद और एक लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई।

 

केस तीन:

शादी के 12 साल बाद की हत्या, उम्र कैद की सजा

राबटर्सगंज कोतवाली क्षेत्र के बभनौली की रहने वाली सबा बेगम की पन्नूगंज थाना क्षेत्र के बनौरा स्थित ससुराल में शादी के 12 वर्ष बाद जून 2022 में जलाकर हत्या कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि उसे असामान्य परिस्थितियों में जलाकर मार डाला गया। मार्च 2025 में पति हसनैन को आजीवन कारावास और ससुराल वालों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई।

 

वर्जन –

 

हाल के वर्षों में महिलाओं से जुड़े अपराधों में तेजी से फैसले हुए हैं। कई ऐसे निर्णय सामने आए हैं जो दूसरों के लिए नजीर बन गए हैं। महज सीएडब्ल्यू की अदालत ने हर माह चार से पांच दोषियों को दंडित किया जा रहा है। – सत्यप्रकाश तिवारी, शासकीय अधिवक्ता।


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